लोकल डेस्क, नीतीश कुमार।
मोतिहारी। मोतिहारी नगर निगम को जिला परिषद की व्यावसायिक संपत्तियों से टैक्स नहीं मिलने का मामला सामने आया है।
वार्ड 18 के पार्षद धीरज जायसवाल ने नगर आयुक्त को पत्र देकर कर निर्धारण और टैक्स वसूली की मांग की है। उनका दावा है कि इससे नगर निगम को हर साल 2 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
पार्षद ने उठाया राजस्व नुकसान का मुद्दा
धीरज जायसवाल ने अपने पत्र में कहा कि 1972 में चंपारण जिले के विभाजन के बाद मोतिहारी जिला परिषद एक अलग इकाई बनी थी। तब से जिला परिषद अपनी दुकानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों से किराया और अन्य शुल्क वसूल रही है।
उन्होंने कहा कि नगर पालिका के नगर निगम बनने के बाद भी जिला परिषद की इन संपत्तियों को निगम के कर दायरे में शामिल नहीं किया गया।
करीब 2 हजार दुकानें, लेकिन टैक्स नहीं
पार्षद के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में जिला परिषद की करीब 2,000 दुकानें, होटल, व्यावसायिक परिसर और अस्थायी दुकानें संचालित हैं। इन जगहों पर बड़े पैमाने पर कारोबार होता है, लेकिन नगर निगम को इनसे कोई कर नहीं मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर निर्धारण नहीं होने और प्रशासनिक लापरवाही के कारण निगम को लगातार राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जांच समिति बनाने का सुझाव
पार्षद ने मांग की है कि एक पारदर्शी समिति बनाकर 15 कार्य दिवस के भीतर जिला परिषद की सभी संपत्तियों और उनके आवंटियों की जांच कराई जाए। रिपोर्ट के आधार पर ट्रेड लाइसेंस, होल्डिंग टैक्स और अन्य कर तय कर वसूली शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नगर निगम का राजस्व नुकसान और बढ़ सकता है। नगर आयुक्त आशीष कुमार ने बताया कि पार्षद धीरज जायसवाल का आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।







