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मोतिहारी पुलिस का साइबर अपराधियों पर बड़ा प्रहार

लोकल डेस्क

UCL आईडी लॉगिन कर आधार डेटा में हेरफेर करने वाले दो शातिर गिरफ्तार। पुलिस ने मौके से 7 पासपोर्ट, 8 आधार कार्ड और मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन योजना के कई संदिग्ध आवेदन किए जब्त।

पूर्वी चंपारण: जिले में साइबर फ्रॉड और डेटा के साथ छेड़छाड़ करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। हरसिद्धि थाना क्षेत्र में गलत आधार विवरण और UCL (Update Client Lite) आईडी का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी करने वाले दो शातिरों को पुलिस ने दबोच लिया है। अपराधियों के पास से भारी मात्रा में पासपोर्ट, आधार कार्ड और सरकारी योजनाओं के आवेदन बरामद किए गए हैं।

गुप्त सूचना पर साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई

मामले की शुरुआत हरसिद्धि थाना क्षेत्र के दुदही निवासी इंसाफवर अली के बारे में मिली एक गुप्त सूचना से हुई। सूचना मिली थी कि इंसाफवर अली साइबर फ्रॉड जैसी अवैध गतिविधियों में लिप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल पुलिस उपाधीक्षक (साइबर) अभिनव परासर के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इंसाफवर अली के घर पर छापेमारी की और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी में पासपोर्ट और सरकारी दस्तावेज बरामद

इंसाफवर अली के घर की तलाशी के दौरान पुलिस को चौंकाने वाले दस्तावेज मिले। गिरोह के कब्जे से 07 पासपोर्ट, 08 आधार कार्ड और तीन अन्य व्यक्तियों के मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन योजना के आवेदन बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह इन दस्तावेजों का उपयोग धोखाधड़ी के लिए कर रहा था।

मधुबन के शातिर साथी के साथ मिलकर रचता था साजिश

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में इंसाफवर अली ने अपने दूसरे साथी मीर आलम का नाम उगला, जो मधुबन थाना क्षेत्र के तकसरी का रहने वाला है। उसने बताया कि वे दोनों मिलकर UCL आईडी लॉगिन के माध्यम से लोगों के आधार कार्ड के डेटा में हेरफेर करते थे। इंसाफवर की निशानदेही पर पुलिस टीम ने पकड़ीदयाल स्थित मीर आलम की दुकान पर धावा बोला। वहां से भी स्कैन किए हुए मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन योजना के आवेदन और संदिग्ध डिजिटल साक्ष्य मिले, जिसके बाद मीर आलम को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

इन अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

इस सफल ऑपरेशन में पुलिस उपाधीक्षक (साइबर) अभिनव परासर के साथ हरसिद्धि थानाध्यक्ष रिषभ कुमार, साइबर टीम मोतिहारी, अविनाश कुमार, राज कुमार और हरसिद्धि थाने के सशस्त्र बल शामिल रहे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों के आधार डेटा के साथ छेड़छाड़ की है और इसके पीछे किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ तो नहीं है।