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मोतिहारी में 'चिमनी माफिया' पर बड़ी गाज

लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।

सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले 140 संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी। अब होगी कुर्की-जब्ती! पूर्वी चंपारण में 27 करोड़ की रिकवरी के लिए निलाम पत्र पदाधिकारी ने कसी कमर; बचने का आखिरी मौका।

पूर्वी चंपारण: जिले में वर्षों से कुंडली मारकर सरकारी खजाने की बड़ी राशि दबाए बैठे चिमनी संचालकों  के 'बल्ले-बल्ले' वाले दिन अब लद गए हैं! निलाम पत्र पदाधिकारी (Certificate Officer) अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने इन हठी और जिद्दी डिफॉल्टरों के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है।

मामला क्या है?

जिला प्रशासन के मुताबिक, इन चिमनी संचालकों के पास सरकार की विशाल राशि फंसी हुई है, जो कि खनन और अन्य शुल्कों के मद में बकाया है। यह खुलासा हुआ है कि डिफॉल्टरों पर सरकार के ₹27,21,26,270 (सत्ताईस करोड़ इक्कीस लाख छब्बीस हज़ार दो सौ सत्तर रुपये) बकाया हैं। हर साल इन चिमनी संचालकों ने ईंट बेचकर अपनी जेबें तो भरीं, लेकिन सरकारी राशि चुकाने के नाम पर हमेशा आनाकानी की। चौंकाने वाली बात यह है कि कई चिमनियां बंद हो चुकी हैं, लेकिन बकाया राशि का भुगतान फिर भी नहीं किया गया है। अब प्रशासन ने फैसला किया है कि उनसे भी एक-एक पैसा वसूल किया जाएगा।

140 गिरफ्तारी वारंट जारी, जेल जाने की तैयारी

बकाया राशि न चुकाने वाले इन 'हठी और जिद्दी' संचालकों के विरुद्ध निलाम पत्र पदाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक साथ 140 गिरफ्तारी वारंट निर्गत कर दिए हैं। इन वारंटों के जारी होते ही चिमनी संचालकों में भगदड़ मच गई है।
हाईलाइट्स: बचने का आखिरी रास्ता निलाम पत्र पदाधिकारी अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने इन डिफॉल्टरों को सख्त चेतावनी देते हुए एक 'अंतिम मौका' दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सलाह दी है कि: जेल से बचने का उपाय: अगर वे गिरफ्तारी और जेल जाने से बचना चाहते हैं, तो अविलंब जिला खनन कार्यालय में जाकर अपनी बकाया राशि सूद (Interest) समेत जमा करें।

दस्तावेज़ जमा करें: राशि जमा करने के बाद, बकाया रहित प्रमाण पत्र (No Dues Certificate) लाकर तुरंत निलाम पत्र कार्यालय में जमा करना होगा।

कुर्की, जब्ती और नीलामी का डंडा!

पदाधिकारी ने साफ किया है कि चेतावनी की अनदेखी करने वालों पर कोई दया नहीं दिखाई जाएगी। बकाया राशि जमा न करने वाले डिफॉल्टरों की कुर्की, ज़ब्ती और उनकी ज़मीन की नीलामी करके भी सरकार की बकाया राशि वसूल की जाएगी।
मृत्यु के बाद भी नहीं मिलेगी माफ़ी! एक महत्वपूर्ण कानूनी पहल में, प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन चिमनी संचालकों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी बकाया राशि भी बिहार पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार उनके उत्तराधिकारियों (Heirs) से वसूल की जाएगी। जिला प्रशासन का यह कदम सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले माफियाओं के लिए एक बड़ी सबक माना जा रहा है। अब देखना यह है कि कितने संचालक इस अंतिम चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं और जेल जाने से बच पाते हैं।