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मोतिहारी में न्याय का दिखा मानवीय चेहरा

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

  • पटना उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश  राजेश कुमार वर्मा ने किया उद्घाटन।

  • 7 महिलाओं को मिला सम्मान, दिव्यांगों को बांटी गई ट्राइसाइकिल।

  • 30 साल पुराने मुकदमों का हुआ निपटारा; 7 करोड़ रुपये के बैंक समझौतों पर लगी मुहर।

  • कुल 27 बेंचों के माध्यम से हजारों मामलों का हुआ त्वरित निष्पादन।

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण के जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को वर्ष 2026 की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय निरीक्षी न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय, श्री राजेश कुमार वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

संवाद से समाधान: न किसी की हार, न किसी की जीत

समारोह को संबोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति श्री राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि समाज में विवादों का होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका समाधान आपसी सूझ-बूझ से करना ही बुद्धिमानी है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत को एक सशक्त मंच बताते हुए कहा कि यहाँ पक्षकार अपनी सहमति से विवादों का सरल और त्वरित अंत कर सकते हैं।
वहीं, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अभिषेक कुमार दास ने इस व्यवस्था की सुंदरता पर प्रकाश डालते हुए कहा, "लोक अदालत में होने वाले फैसलों में न किसी की हार होती है और न जीत, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्द की जीत होती है।"

न्याय के साथ सामाजिक सरोकार

यह आयोजन केवल मुकदमों के निपटारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ न्याय का मानवीय और सामाजिक पक्ष भी देखने को मिला।

  • महिला सशक्तिकरण: कार्यक्रम के दौरान 7 महिलाओं को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
  • कल्याणकारी सहायता: अनुसूचित जाति कल्याण योजना के तहत 5 लाभुकों को विक्टिम कम्पनसेशन के चेक सौंपे गए।
  • दिव्यांग सहायता: 5 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल प्रदान कर उनके जीवन को सुगम बनाने की दिशा में कदम उठाया गया।

आंकड़ों में सफलता की कहानी

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री नितिन त्रिपाठी की देखरेख में आयोजित इस लोक अदालत के लिए कुल 27 बेंचों का गठन किया गया था (सदर में 22, अरेराज में 1 और ढाका में 4)।

  • ऐतिहासिक निपटारा: अरेराज न्यायालय से 30 वर्ष पुराने जटिल वादों का सफलतापूर्वक अंत हुआ।
  • वित्तीय समझौता: बैंकों के माध्यम से लगभग 7 करोड़ रुपये का समझौता कराया गया, जबकि माप-तौल विभाग द्वारा 92,000 रुपये की वसूली की गई।
  • कुल मामले: समझौते के आधार पर 1000 न्यायालयीय वादों और 2000 बैंक ऋण संबंधी मामलों का निष्पादन हुआ।

गरिमामय उपस्थिति

मंच पर प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय)  इसरार अहमद, जिलाधिकारी  सौरभ जोरवाल, पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री शेषनाथ कुंवर और महासचिव श्री राजीव कुमार द्विवेदी उर्फ पप्पू दुबे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन एसीजेएम श्रीमती श्वेता सिंह ने किया।

इस अवसर पर मुकुंद कुमार, रेशमा वर्मा, राजविजय सिंह समेत जिले के तमाम वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में वादकारी मौजूद थे। सचिव श्री नितिन त्रिपाठी ने अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इसे आम जनता के लिए सस्ता और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने वाला तंत्र बताया।