नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और चर्चित शिक्षक अवध ओझा का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने कहा कि देश के 22 करोड़ मुसलमान मोदी सरकार को हटाने के लिए नमाज पढ़ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है, जिससे वे परेशान हैं। उनका यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
यह टिप्पणी यूट्यूब चैनल 'सोनू शर्मा' पर प्रसारित एक पॉडकास्ट के दौरान सामने आई, जहां उनसे ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर सवाल पूछे गए थे। जवाब में अवध ओझा ने कहा कि देश की राजनीति में कई बार ऐसे मुद्दों को प्रमुखता दी जाती है, जिन पर जनता तुरंत प्रतिक्रिया देती है। उनका कहना था कि आर्थिक या विकास संबंधी विषयों की तुलना में पाकिस्तान और मुसलमानों का मुद्दा अधिक राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा करता है और नेताओं को भी ऐसे मुद्दों पर ज्यादा तालियां मिलती हैं।
पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान ओझा ने पाकिस्तान को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा कमजोर देशों से टकराव में लगाने के बजाय बड़े वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश से लड़ने के बजाय भारत को उन देशों से मुकाबला करना चाहिए, जो आर्थिक और तकनीकी रूप से अधिक मजबूत हैं। उनके इस बयान के कई हिस्से सोशल मीडिया पर अलग-अलग क्लिप के रूप में वायरल हो रहे हैं।
मुसलमानों को लेकर की गई टिप्पणी में अवध ओझा ने कहा कि देश के मुसलमान मोदी सरकार के खिलाफ नमाज पढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार नहीं बदल रही है। उन्होंने इसे व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करते हुए कहा कि शायद उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनकी दुआ क्यों पूरी नहीं हो रही है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक व्यंग्य बताया, जबकि कई लोगों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति भी जताई है।
पॉडकास्ट में अवध ओझा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज सीट से अपनी उम्मीदवारी और चुनाव परिणाम पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह खुद को चुनाव में हारा हुआ नहीं मानते। उनके अनुसार, जब उन्होंने चुनाव मैदान में कदम रखा था, तब पार्टी के कई स्थानीय कार्यकर्ता नाराज थे, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सभी से मुलाकात कर उनका विश्वास जीतने का प्रयास किया। उनका दावा था कि धीरे-धीरे पूरा संगठन उनके समर्थन में आ गया और उन्हें लोगों का भरपूर स्नेह मिला।
उन्होंने अपनी हार का कारण बताते हुए कहा कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार से नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव से चुनाव हारे। ओझा ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा उनके प्रतिद्वंद्वी के पक्ष में किए गए प्रचार और समर्थन का असर मतदाताओं पर पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ने और जमानत जब्त होने की आशंका जताई थी, लेकिन उन्होंने चुनौती स्वीकार की। ओझा के इन बयानों के वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं और उन पर लगातार राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।







