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मोरक्को में तौहीन–ए–इस्लाम के आरोप में मिली ढाई साल की जेल और ₹12.5 लाख का जुर्माना

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

मोरक्को में तौहीन–ए–इस्लाम के आरोप में मिली ढाई साल की जेल और ₹12.5 लाख का जुर्माना

मोरक्को की राजधानी रबात की अदालत ने प्रसिद्ध फेमिनिस्ट व क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट इब्तिसाम लशगर को इस्लाम की तौहीन के आरोप में 30 महीने की जेल और 50,000 मोरक्कन दिरहम (लगभग ₹12.5 लाख) जुर्माना सुनाया है। यह मामला वैश्विक स्तर पर धार्मिक संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रकट विवादों में नया अध्याय जोड़ता है।

क्या हुआ था?

इब्तिसाम लशगर, जिनकी पहचान एक प्रबल सामाजिक कार्यकर्ता और मनोचिकित्सक के रूप में है, पर अदालत ने यह आरोप लगाया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस्लाम के प्रति अनुचित और अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। अदालत ने इसे धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन मानते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की।

न्यायिक फैसले का प्रभाव

यह फैसला विश्व स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं की रक्षा के बीच जारी संवैधानिक और नैतिक संघर्ष को उजागर करता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि कई देशों में धार्मिक असंवेदनशीलता के आरोप गंभीर मुकदमों में बदल सकते हैं।

विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए यह मामला चिंतनीय प्रतीत होता है, क्योंकि यह संकेत देता है कि किसी भी विषय पर बोलने से पहले देश के धार्मिक और सामाजिक संदर्भों को ध्यान में रखना कितना महत्वपूर्ण है।

वहीं, मोरक्को में यह मामला अदालत ने सीधे प्रभावी रूप से करार दिया, जो धर्म की तौहीन पर विश्वभर में अलग-अलग देशों द्वारा अपनाए गए कठोर दृष्टिकोण का प्रतीक बन गया है।

मोरक्को की अदालत का यह निर्णय तकरीबन 30 महीने जेल और ₹12.5 लाख जुर्माने की सज़ा निर्धारित कर के यह स्पष्ट संदेश देता है कि धार्मिक मान्यताएं और भावनात्मक संवेदनाएँ कानून के दायरे में सुरक्षित हैं। साथ ही, यह मामला विकसित राष्ट्रों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर जारी बहस का भी हिस्सा बन चुका है।