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यूक्रेन को 8 अरब डॉलर ऋण सहायता बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वॉशिंगटन : अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने यूक्रेन को आठ अरब डॉलर की ऋण सहायता उपलब्ध कराने तथा रूस के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधों को मंजूरी देने वाले एक महत्वपूर्ण द्विदलीय विधेयक को पारित कर दिया है। चार वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उठाया गया यह कदम ट्रंप प्रशासन की अब तक की नीति से अलग माना जा रहा है।

सदन में हुए मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 226 और विरोध में 195 मत पड़े। उल्लेखनीय है कि कई रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट सदस्यों के साथ मिलकर इसका समर्थन किया, जिससे यह प्रस्ताव बहुमत हासिल करने में सफल रहा।

‘यूक्रेन सपोर्ट एक्ट’ नामक इस विधेयक को विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स द्वारा पेश किया गया था। विधेयक ऐसे समय सदन में लाया गया जब कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए डेमोक्रेट्स का साथ दिया। पार्टी नेतृत्व इस विषय पर मतदान टालने के पक्ष में था, लेकिन दोनों दलों के सांसदों के संयुक्त समर्थन से प्रस्ताव को चर्चा और मतदान के लिए आगे बढ़ाया गया।

विधेयक के तहत यूक्रेन और नाटो सहयोगी देशों को विदेशी सैन्य वित्तपोषण कार्यक्रम के माध्यम से आठ अरब डॉलर तक के ऋण की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त यूक्रेन की सहायता, बाल्टिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने तथा अन्य रणनीतिक कार्यक्रमों के लिए एक अरब डॉलर से अधिक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। समर्थकों का कहना है कि यह सहायता रूस के खिलाफ यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक सीनेट में विचार के लिए जाएगा, जहां इसे अपेक्षाकृत अधिक राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सीनेट से मंजूरी मिलने की स्थिति में इसे कानून का रूप देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चरण में विधेयक का भविष्य काफी हद तक रिपब्लिकन समर्थन और व्हाइट हाउस के रुख पर निर्भर करेगा।

इस बीच अमेरिकी कांग्रेस में विदेश नीति को लेकर मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। हाल ही में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर एक अन्य प्रस्ताव का समर्थन किया था, जिसमें ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों पर कांग्रेस की स्वीकृति को अनिवार्य बनाने की बात कही गई थी। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ दल के भीतर भी अलग-अलग मत उभर रहे हैं।

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम कराने के प्रयास अब तक सफल नहीं हो सके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान दावा किया था कि सत्ता में लौटने पर वह युद्ध को बेहद कम समय में समाप्त करा देंगे, लेकिन अब तक ऐसा संभव नहीं हो पाया है। हालिया संसदीय सुनवाई में प्रशासन की ओर से भी स्वीकार किया गया कि दोनों देशों के बीच वार्ता की प्रक्रिया फिलहाल ठहराव की स्थिति में है और किसी ठोस समाधान की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।

मतदान के बाद विधेयक के समर्थक सांसदों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के समर्थन में उठाया गया अहम कदम बताया। उनका कहना है कि यूक्रेन को सहायता प्रदान करना केवल एक देश की मदद का मामला नहीं है, बल्कि उन सिद्धांतों की रक्षा का प्रश्न है जिन पर वैश्विक व्यवस्था आधारित है। समर्थक सांसदों ने उम्मीद जताई कि सीनेट भी इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी और अमेरिका यूक्रेन के समर्थन में अपनी प्रतिबद्धता को आगे भी जारी रखेगा।