स्टेट डेस्क - प्रीति पायल
उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब आगे बढ़ गई है। करीब चार वर्षों बाद राज्य को पूर्णकालिक डीजीपी मिलने की संभावना तेज हो गई है। इस मुद्दे पर हाल ही में दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों और यूपीएससी की प्रक्रिया में तेजी देखी गई है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक डीजीपी के माध्यम से पुलिस विभाग का संचालन किया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी भी राज्य में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) के पैनल के आधार पर की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल केंद्र को भेजा था।
सूत्रों के अनुसार, इस बार चयन प्रक्रिया में वरिष्ठता, अनुभव और सेवा अवधि को प्रमुख आधार बनाया गया है। जिन अधिकारियों के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं उनमें राजीव कृष्ण, रेणुका मिश्रा और पीयूष आनंद शामिल बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यूपीएससी जल्द ही तीन नामों का पैनल राज्य सरकार को सौंप सकती है, जिसके बाद अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा।
इस नियुक्ति प्रक्रिया में पहले कई अड़चनें भी आई थीं। यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए कुछ प्रस्तावों को तकनीकी कारणों और नई गाइडलाइंस का हवाला देते हुए वापस कर दिया था। आयोग ने पूछा था कि जिन अधिकारियों के नाम भेजे गए हैं, उनकी सेवा अवधि और पात्रता सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप है या नहीं। इसके बाद राज्य सरकार ने संशोधित प्रस्ताव तैयार कर दोबारा भेजा।
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी पुलिस प्रमुख होने से प्रशासनिक स्थिरता बढ़ती है, अपराध नियंत्रण की रणनीति बेहतर बनती है और पुलिस विभाग में नेतृत्व स्पष्ट होता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह पद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से काफी अहम माना जाता है।
बताया जा रहा है कि यदि प्रक्रिया में कोई नई बाधा नहीं आई तो उत्तर प्रदेश को जल्द ही नया स्थायी डीजीपी मिल सकता है। इससे पुलिस प्रशासन में लंबे समय बाद स्थिर नेतृत्व स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।







