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योजनाओं में पारदर्शिता किसानों की सशक्तता कुंजी: CM सोरेन

स्टेट डेस्क, प्रीति पायल |

रांची: हेमन्त सोरेन ने एक अहम बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश के कृषकों के सशक्तिकरण के लिए योजनाओं में पारदर्शिता अनिवार्य है। उनका मानना है कि सरकारी कार्यक्रमों को परिणाम-उन्मुख और पारदर्शी ढंग से क्रियान्वित करने से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर होगी।

झारखंड विधानसभा परिसर में सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (सिद्धकोफेड/SIDHKOFED) के निदेशक मंडल की चौथी बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री सोरेन ने स्वयं इस बैठक का संचालन किया।

प्रमुख मुद्दे

बैठक में निम्नलिखित विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ:

  • कृषि एवं वनोपज सेक्टर को सुदृढ़ करने की रणनीति
  • कृषकों की वार्षिक आमदनी में वृद्धि के तरीके
  • स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने की योजना
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सुदृढ़ीकरण
  • मार्केटिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाना
  • फसल क्रय प्रणाली, MSP, और जल संरक्षण से जुड़े प्रश्न

सीएम सोरेन ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिनमें किसानों को उचित दाम और समयबद्ध भुगतान की गारंटी शामिल है। उन्होंने एक स्थानीय डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसान सहायता ऐप तैयार करने का आदेश दिया, जिसके माध्यम से उपभोक्ता किसानों से सीधे उत्पाद खरीद सकेंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका घटेगी और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार पर भी बल दिया गया, ताकि किसानों को तुरंत बाजार सूचना और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके। वनोपज के मूल्यवर्धन और इसकी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। योजनाओं में कड़ी पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया ताकि फायदे सीधे कृषकों तक पहुँचें।

झारखंड सरकार की यह सहकारी इकाई आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों सिद्धो-कान्हो के सम्मान में स्थापित की गई है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में कृषि और लघु वनोपज को प्रोत्साहन, ग्रामीण किसानों व संग्राहकों को संगठित कर उन्हें बेहतर बाजार व प्रशिक्षण देना, और सहकारी समितियों का सशक्तिकरण शामिल है।

बैठक में अनेक प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जो किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में अहम कदम हैं। यह पहल झारखंड सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों का अंग है, जिसमें डिजिटल साधनों और पारदर्शी तंत्र के जरिए कृषकों को सशक्त बनाने पर फोकस है।