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रक्सौल: बाजार में सन्नाटा, 100 रुपये से अधिक खरीदारी पर भन्सार टैक्स

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: नेपाल की नई सरकार द्वारा नेपाल सीमा पर 100 रुपये से अधिक की खरीददारी पर भन्सार (टैक्स) लगाए जाने के फैसले का सीधा असर अब सीमावर्ती रक्सौल के बाजारों में देखने को मिल रहा है। रक्सौल - बीरगंज के सीमाई व्यापार और आम लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ा है, जिससे आम जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। रोजमर्रा की चहल-पहल के लिए पहचाने जाने वाले बाजारों में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानदारों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है, वहीं छोटे व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस फैसले से न केवल व्यापार ठप हुआ है, बल्कि भारत-नेपाल के पारंपरिक रोटी-बेटी संबंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर भारत विकास परिषद, रक्सौल के अध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी, रक्सौल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव,महासचिव शंभु प्रसाद चौरसिया,लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष बिमल कुमार सर्राफ एवं टेक्सटाइल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता और इंडो नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स,रक्सौल के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से अपनी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच संबंध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सदियों पुराना सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जुड़ाव है। भारत और नेपाल का रिश्ता राजनीतिक सीमाओं से कहीं बड़ा है - यह दिलों का रिश्ता है। इसे कमजोर करने की कोशिश किसी के हित में नहीं है। ऐसे में सीमा पर आम लोगों, विशेषकर गरीब परिवारों और महिलाओं के साथ सख्ती और कर भार बढ़ाना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

व्यापारिक प्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस नीति की पुनः समीक्षा की जाए, सीमा पर आम लोगों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की जाए।

उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि रोटी - बेटी के रिश्ते करने वाले ऐसे फैसलों पर पुनर्विचार जरूरी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सामाजिक संबंधों पर और गहरा पड़ सकता है।