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रक्सौल-मोतिहारी ठगी कांड: सरगना इनामुल पर शिकंजा

लोकल डेस्क, एन.के. सिंह |

मोतिहारी में 100 से अधिक युवाओं को बचाया गया, गिरोह का संबंध रक्सौल के इनामी सरगना इनामुल हक के गैंग से जुड़ा पताही के युवक का तार।

पूर्वी चंपारण: नौकरी के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने करीब 100 युवाओं को बचाया है और ठग गिरोह के सरगना समेत 20 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई।

मोतिहारी में नकली नौकरी रैकेट का पर्दाफाश

पुलिस ने मोतिहारी के छतौनी थाना क्षेत्र के छोटाबरियारपुर में एक ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो युवाओं को नौकरी का झांसा देकर फंसाता था। पुलिस ने इस कार्रवाई में बंगाल, असम, झारखंड और बिहार के कटिहार जिले से आए 100 से अधिक बेरोजगार युवकों को बचाया है। छतौनी थानाध्यक्ष सुनील कुमार की गुप्त सूचना पर पुलिस ने छापा मारकर गिरोह के 20 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब इस गिरोह के सरगना से पूछताछ कर रही है।

ठगी का तरीका

रेस्क्यू किए गए युवकों में से एक, असम के अब्दुल अजित ने बताया कि उन्हें व्हाट्सएप और मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नौकरी का विज्ञापन देखकर मोतिहारी बुलाया गया था। यहां आने पर उनसे एक फॉर्म भरने को कहा गया और फिर खाना और रहने की सुविधा के नाम पर 17,000 रुपये नकद मांगे गए। पैसा लेने के बाद न तो कोई काम दिया जाता था और न ही कोई वेतन।

सरगना दीपक महतो गिरफ्तार

सदर डीएसपी दिलीप कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सरगना की पहचान पताही निवासी दीपक महतो के रूप में हुई है। उसने छोटाबरियारपुर में शंभु साह का मकान किराए पर लेकर "आटोमिक आयूर्वेद लिमिटेड" नाम से एक फर्जी कंपनी खोल रखी थी। पुलिस ने कंपनी के कार्यालय से कई दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनकी जांच चल रही है।

रक्सौल से जुड़े हैं तार

डीएसपी ने बताया कि इस फर्जी कंपनी का तार रक्सौल में पहले हुए एक बड़े फर्जीवाड़े से जुड़े होने की आशंका है। रक्सौल में डीबीआर नामक एक ऐसी ही फर्जी कंपनी पर पुलिस ने पहले भी कार्रवाई की थी। इस मामले की भी गहन छानबीन की जा रही है।

कमीशन का लालच देकर और युवाओं को फंसाया जाता था

बचाए गए युवकों ने बताया कि यहां आने पर उनके रिश्तेदारों के फोन नंबर नोट किए जाते थे। इसके बाद उन्हें दो लड़कों को जोड़ने पर 1,000 रुपये और चार लड़कों को जोड़ने पर 2,500 रुपये का कमीशन देने का लालच दिया जाता था। इस तरह यह गिरोह और भी अधिक बेरोजगार युवाओं को फंसाने की कोशिश कर रहा था।

छापेमारी में सदर डीएसपी दिलीप कुमार, छतौनी थानाध्यक्ष सुनील कुमार सहित अन्य पुलिस अधिकारी और जवान शामिल थे। सभी रेस्क्यू किए गए युवकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और उनके आने पर उन्हें उनके हवाले कर दिया जाएगा।