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रतले परियोजना में 29 कर्मियों का संदिग्ध आतंकी कनेक्शन

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय |

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित रतले जलविद्युत परियोजना (Ratle Hydroelectric Project) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। पुलिस की एक हालिया जांच और वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान परियोजना में कार्यरत 29 कर्मियों का आतंकी कनेक्शन सामने आया है। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह परियोजना न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने रतले जलविद्युत परियोजना के प्रबंधन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को एक औपचारिक पत्र लिखकर आगाह किया है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना में काम कर रहे 29 कर्मचारी संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं या उनके तार सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं या स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इन कर्मियों में से कुछ का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जबकि कुछ के हालिया संपर्क संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि ये कर्मी परियोजना की सुरक्षा के लिए एक "गंभीर खतरा" साबित हो सकते हैं और भविष्य में किसी भी बड़ी आतंकी साजिश या तोड़फोड़ की घटना को अंजाम देने में मददगार बन सकते हैं।

किश्तवाड़ और चिनाब घाटी का यह क्षेत्र पिछले कुछ समय से आतंकियों के निशाने पर रहा है। रतले परियोजना, जो चिनाब नदी पर बन रही एक 'रन-ऑफ-द-रिवर' योजना है, भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। पुलिस का कहना है कि आतंकियों की रणनीति अब महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के भीतर घुसपैठ करने की है ताकि वे अंदरूनी जानकारी हासिल कर सकें। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन 29 कर्मियों की मौजूदगी से न केवल परियोजना को नुकसान पहुँच सकता है, बल्कि वहां काम कर रहे अन्य इंजीनियरों और अधिकारियों की जान को भी खतरा हो सकता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संबंधित एजेंसी को इन सभी 29 कर्मियों को तत्काल प्रभाव से काम से हटाने और उनके खिलाफ सख्त जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने सिफारिश की है कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति से पहले उसका मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए। स्थानीय खुफिया तंत्र को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परियोजना स्थल के आसपास कोई भी संदिग्ध गतिविधि न हो।

यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा की चुनौती कितनी बड़ी है, यह इस खुलासे से स्पष्ट होता है। रणनीतिक परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर भर्ती करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वर्तमान में, पूरी परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा घेराबंदी बढ़ा दी गई है और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि देश की इस महत्वपूर्ण संपत्ति को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जा सके।