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राजनाथ का हिंसा छोड़ लोकतांत्रिक राह अपनाने का आह्वान

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उनसे हिंसा और अराजकता का रास्ता छोड़कर संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक माध्यमों से सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने का आह्वान किया।

उन्होंने अपने भाषण में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध मंत्र "शिक्षित करो, आंदोलन करो और संगठित हो" का उल्लेख करते हुए कहा कि यही सूत्र आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब लोकतांत्रिक रास्ते उपलब्ध हों, तब हिंसा या असंवैधानिक तरीकों की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि स्वयं डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में हिंसा, अराजकता और असंवैधानिक तरीकों के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी दी थी और इन्हें "अराजकता का व्याकरण" (ग्रामर ऑफ एनार्की) करार दिया था। उन्होंने कहा कि जब संविधान ने हर नागरिक को अपनी बात कहने, विरोध जताने और न्याय पाने के वैध व शांतिपूर्ण रास्ते दिए हैं, तो हिंसा का सहारा लेना न केवल अनुचित है बल्कि लोकतंत्र की भावना के भी विपरीत है।

श्री सिंह ने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों को न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व—संविधान के इन्हीं चार मूल स्तंभों के आधार पर युवा मस्तिष्क को गढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें व्यावहारिक कौशल, समस्या-समाधान की क्षमता, मानवीय मूल्य और सामाजिक संवेदनशीलता का भी समावेश होना चाहिए, ताकि छात्र समाज की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सकें।

छात्रों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने उनसे केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि रोजगार सृजक (जॉब क्रिएटर) बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज का युवा समस्याओं का समाधानकर्ता और बदलाव का उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) बन सकता है, बशर्ते वह नवाचार और उद्यमशीलता की भावना अपनाए। तेजी से बदलती तकनीक का हवाला देते हुए उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें और समय के साथ खुद को ढालते रहें, क्योंकि तकनीकी बदलाव अब पहले से कहीं अधिक तीव्र गति से हो रहे हैं।

अपने संबोधन में श्री सिंह ने वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के सरकार के लक्ष्य का भी जिक्र किया और छात्रों से इस राष्ट्रीय मिशन में "टीम इंडिया" के एक सक्रिय सदस्य के रूप में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, मानसिक लचीलापन और कड़ी मेहनत के बल पर कोई भी बड़ी से बड़ी चुनौती अवसर में बदली जा सकती है। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आज दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र आने वाले वर्षों में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और बाबा साहेब के सपनों के भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

समारोह में विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी तथा उनके परिजन उपस्थित रहे।