नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को भी राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के लगातार हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नीट यूजी परीक्षा लीक मामले में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब की मांग की। विपक्ष के जोरदार विरोध और नारेबाजी के कारण सभापति को कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
कार्यवाही की शुरुआत में सभापति जगदीप धनखड़ ने आवश्यक विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके तुरंत बाद विपक्षी सदस्य अपनी-अपनी सीटों से उठकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर बयान देने की मांग करने लगे। विपक्ष का कहना था कि छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच सभापति ने सदन को व्यवस्थित करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी।
संसदीय कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पाने के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। मानसून सत्र के सातवें दिन भी कोई महत्वपूर्ण विधायी कार्य नहीं हो सका। इससे पहले भी सत्र के शुरुआती छह दिनों में विपक्ष के विरोध और सत्ता पक्ष के साथ गतिरोध के कारण अधिकांश समय सदन की कार्यवाही बाधित रही थी।
सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव का असर पूरे मानसून सत्र पर साफ दिखाई दे रहा है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष अपने रुख पर कायम है। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से सदन में गतिरोध बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच जल्द संवाद स्थापित नहीं हुआ तो मानसून सत्र का बड़ा हिस्सा बिना किसी ठोस विधायी उपलब्धि के समाप्त हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी बैठकों में गतिरोध खत्म करने के लिए क्या पहल होती है और संसद की कार्यवाही सामान्य हो पाती है या नहीं।







