नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नयी दिल्ली : कांग्रेस ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस प्रकरण ने देशभर के राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, इसलिए प्रधानमंत्री को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव और प्रदेश कांग्रेस महासचिव अनिल भारद्वाज ने शनिवार को राजीव भवन स्थित दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बजाय तथ्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार के मामलों में पहले प्राथमिकी दर्ज की जाती है, लेकिन इस मामले में सीधे विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एसआईटी के गठन से पहले मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ न तो कोई प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही उन्हें जांच के दायरे में शामिल किया गया। उनका आरोप था कि अब तक की कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रही है, जबकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से भी पूछताछ आवश्यक है।
पार्टी ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विभिन्न आयोजनों पर मनमाने ढंग से खर्च किया गया। कांग्रेस का दावा है कि 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये और एक अन्य कार्यक्रम पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च दर्शाया गया। नेताओं का कहना था कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए और यदि वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चढ़ावे से जुड़े इस मामले पर प्रधानमंत्री मोदी अब तक पूरी तरह मौन हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री एक प्रभावशाली वक्ता हैं, लेकिन वे केवल उन्हीं मुद्दों पर बोलते हैं जिन्हें वे उचित समझते हैं। उनका कहना था कि राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल से जुड़े इस गंभीर मामले पर अब तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आना कई सवाल खड़े करता है।
पार्टी ने पूरे प्रकरण की उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच कराने, राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने, मंदिर के सभी वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा दोषियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनसे विस्तृत पूछताछ किए बिना ही जेल भेज दिया गया। उनका कहना था कि यदि गहन पूछताछ होती तो मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती थी।







