लोकल डेस्क, एन के सिंह।
रामगढ़वा के रेशमा देवी कन्या उच्च विद्यालय में 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का आगाज़
पूर्वी चंपारण: "बाल विवाह एक अभिशाप है और हम इसे जड़ से मिटाकर ही दम लेंगे।" कुछ इसी संकल्प के साथ प्रखंड के रेशमा देवी कन्या उच्च विद्यालय (+2) में छात्राओं ने बाल विवाह के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की। महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार सरकार के निर्देशानुसार 'जिला हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन' द्वारा आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में छात्राओं को सशक्त बनाने का मंत्र दिया गया।
शिक्षा ही है सशक्तिकरण का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेंडर विशेषज्ञ निर्भय कुमार ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बेटियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके सुनहरे भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने छात्राओं को POCSO और POSH अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी, ताकि वे अपने अधिकारों की रक्षा स्वयं कर सकें।
हेल्पलाइन नंबर: सुरक्षा अब बस एक कॉल दूर
छात्राओं को किसी भी आपात स्थिति या हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों के बारे में विस्तार से बताया गया:
181: महिला हेल्पलाइन
1098: चाइल्ड हेल्पलाइन
1930: साइबर अपराध हेल्पलाइन
वन स्टॉप सेंटर: एक ही छत के नीचे सभी कानूनी व चिकित्सीय सहायता।
सामूहिक शपथ से गूंजा विद्यालय परिसर
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था, जब प्रधानाध्यापक डॉ. राजीव रंजन की उपस्थिति में सैकड़ों छात्राओं ने एक साथ हाथ उठाकर सामूहिक शपथ ली। छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं बाल विवाह का विरोध करेंगी, बल्कि समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाएंगी और कहीं भी बाल विवाह होने पर तुरंत विभाग को सूचित करेंगी।
शिक्षक और बेटियों का साझा संकल्प: 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि जब बेटियां शिक्षित होंगी, तभी समाज सुरक्षित होगा। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक और जिला टीम के सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस बदलाव की लहर में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
क्या कहती हैं छात्राएं?
"आज हमें पता चला कि कानून हमारी सुरक्षा के लिए कितना सजग है। अब हम चुप नहीं रहेंगे, अपनी सहेलियों और समाज को भी इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूक करेंगे।"







