राष्ट्रीय संस्कृत वि वि में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा से मानसिक स्वास्थ्य पर व्याख्यान
स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना।
नई दिल्ली: मानसिक स्वास्थ्य आज वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहा है। तनाव, चिंता, अवसाद तथा अनियमित जीवनशैली के बढ़ते प्रभावों के बीच भारतीय ज्ञान-परम्परा में निहित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन का प्रभावी मार्ग प्रस्तुत करते हैं।
इसी उद्देश्य को दृष्टिगत रखते हुए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सांख्ययोग एवं योग विज्ञान विभाग द्वारा "मानसिक स्वास्थ्य एवं दैनिक जीवन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की उपयोगिता" विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आचार्यगण, शोधार्थियों एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।कार्यक्रम के अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान-परम्परा में योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास का समग्र विज्ञान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे अत्यंत समसामयिक विषय पर आयोजित यह विशिष्ट व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में योग के वैज्ञानिक स्वरूप, स्वस्थ जीवनशैली तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विभाग द्वारा आयोजित इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसके सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने भी अपने शुभकामना संदेश में कहा कि स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन एवं अनुशासित जीवन किसी भी व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व-विकास की आधारशिला हैं।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को योग, प्राकृतिक चिकित्सा तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के जीवनोपयोगी सिद्धांतों को समझने और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने सांख्ययोग एवं योग विज्ञान विभाग के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. नवीन जी. हलप्पा, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ योगा, नेचुरोपैथी एंड कॉग्निटिव स्टडीज़, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), लखनऊ ने मानसिक स्वास्थ्य, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक तथा व्यावहारिक पक्षों पर अत्यंत प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में तनाव, चिंता, अवसाद, अनियमित दिनचर्या एवं असंतुलित खान-पान अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों के प्रमुख कारण हैं। इन समस्याओं से बचाव के लिए नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम, ध्यान, संतुलित एवं पौष्टिक आहार तथा प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने यह भी बताया कि योगासन शरीर को स्वस्थ एवं लचीला बनाते हैं, प्राणायाम मानसिक शांति एवं एकाग्रता प्रदान करता है तथा नियमित ध्यान मानसिक तनाव एवं चिंता को कम करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है। उन्होंने मधुमेह, मोटापा, माइग्रेन, पीसीओएस तथा अन्य जीवनशैली-जनित विकारों के प्रबंधन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। साथ ही विद्यार्थियों को समयबद्ध दिनचर्या, पर्याप्त जल सेवन, संतुलित आहार, पर्याप्त निद्रा एवं नियमित शारीरिक गतिविधियों के महत्व से अवगत कराया।व्याख्यान के उपरान्त आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका डॉ. हलप्पा ने वैज्ञानिक एवं सरल शैली में समाधान किया।
कार्यक्रम के समापन पर विभाग की ओर से मुख्य वक्ता को स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।यह विशिष्ट व्याख्यान केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा के वैज्ञानिक एवं जीवनोपयोगी स्वरूप को समाज तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवनशैली ही सुखी एवं समृद्ध समाज की आधारशिला हैं। विश्वविद्यालय द्वारा ऐसे विषयों पर आयोजित कार्यक्रम भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण, संवर्धन एवं समाजोपयोगी प्रसार के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता के सशक्त प्रमाण हैं।







