विदेश डेस्क, ऋषि राज।
सेंट पीटर्सबर्ग: रूस ने दावा किया है कि उसने वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है और अब उसकी अर्थव्यवस्था बाहरी वित्तीय दबावों तथा विदेशी सरकारों के निर्णयों पर पहले की तुलना में काफी कम निर्भर है। रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (SPIEF) के दौरान यह बात कही।
आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए सिलुआनोव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद रूस ने अपनी वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और कई देशों को आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन रूस ने इन चुनौतियों के बीच अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है।
रूस के वित्त मंत्री ने कहा कि देश ने घरेलू संसाधनों को मजबूत करने, वैकल्पिक वित्तीय तंत्र विकसित करने और राष्ट्रीय आर्थिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया है। इसी का परिणाम है कि रूस अब स्वयं को वित्तीय दृष्टि से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर मानता है। उन्होंने कहा कि रूस की वर्तमान आर्थिक स्थिति उसे बाहरी वित्तीय प्रभावों से निपटने की शक्ति प्रदान करती है।
सिलुआनोव ने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए विभिन्न आर्थिक प्रतिबंधों के बाद रूस ने अपने वित्तीय और व्यापारिक तंत्र में कई बदलाव किए हैं। इससे देश की आर्थिक संरचना अधिक लचीली और मजबूत बनी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रूस भविष्य में भी आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है। ऊर्जा बाजार, व्यापारिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्थाओं में हो रहे बदलावों के बीच रूस अपनी आर्थिक नीतियों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि रूस की अर्थव्यवस्था को अभी भी वैश्विक बाजार, ऊर्जा निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारकों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद रूस सरकार अपनी आर्थिक नीतियों और वित्तीय सुधारों को देश की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक बता रही है।
रूस का यह दावा वैश्विक आर्थिक जगत में नई चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस अपनी वित्तीय आत्मनिर्भरता को किस प्रकार बनाए रखता है और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने के लिए कौन से कदम उठाता है।







