Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

लखनऊ में आरक्षण विरोधी आंदोलन शुरू

स्टेट डेस्क, श्रेया पाण्डेय।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आज एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां आरक्षण विरोधी आंदोलन आज से शुरू हो गया है। 'सवर्ण मोर्चा' के बैनर तले यह विरोध प्रदर्शन शहर के शहीद स्मारक पर आयोजित किया जा रहा है, जो 31 जुलाई से 2 अगस्त तक तीन दिनों तक चलेगा। इस आंदोलन को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और गरमाने की आशंका जताई जा रही है।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सामान्य वर्ग यानी सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों में लगातार आक्रोश देखा गया है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों और समाज में जबरदस्त नाराजगी सामने आई थी, जिसके विरोध में कई छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान लखनऊ के परिवर्तन चौक पर भी सवर्ण मोर्चा ने एक बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग एकत्र हुए और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।

इसी तर्ज पर अब शहीद स्मारक पर शुरू हुआ यह ताजा आंदोलन भी आरक्षण नीति और सामान्य वर्ग से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि सरकार की मौजूदा आरक्षण नीतियां सामान्य वर्ग के हितों के अनुकूल नहीं हैं और इसमें बदलाव की आवश्यकता है। तीन दिवसीय इस धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

चूंकि यह आंदोलन एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दे से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन की ओर से एहतियात के तौर पर शहीद स्मारक और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई जा सकती है, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। इस तरह के आंदोलन अक्सर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म देते हैं, खासकर तब जब आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं। विपक्षी दल और सत्तारूढ़ पार्टी दोनों ही इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर भी इस पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आंदोलन जातिगत जनगणना और आरक्षण नीति में बदलाव जैसे व्यापक राष्ट्रीय बहस से भी जुड़े हुए हैं, जो पिछले कुछ समय से देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में लखनऊ का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, खासकर यदि अन्य सामाजिक संगठन भी इसमें शामिल हो जाते हैं।