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वंदे भारत में खाने से निकला एल्यूमिनियम तार, यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय |

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, जिसे भारतीय रेलवे की सबसे आधुनिक और तेज़ रफ्तार ट्रेन के रूप में प्रचारित किया जाता है, एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला है यात्रियों को परोसे गए भोजन में एल्यूमिनियम का तार मिलने का, जिसने न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि रेलवे के खानपान मानकों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

घटना मध्य प्रदेश के भोपाल से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन की बताई जा रही है, जिसमें एक यात्री को उसकी थाली में खाना खाते समय *एक पतला एल्यूमिनियम तार* मिला। यात्री ने तुरंत इसकी सूचना ट्रेन स्टाफ को दी और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें साझा कर दीं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं। तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि खाने के बीच में एक छोटा, किंतु नुकीला तार मौजूद था, जो यदि निगल लिया जाता तो गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता था।

रेलवे अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉरपोरेशन (IRCTC), जो वंदे भारत ट्रेनों में खानपान की ज़िम्मेदारी संभालता है, ने संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि यह तार संभवतः उस एल्युमिनियम फॉयल से आया हो सकता है, जिसमें खाना लपेटा गया था, लेकिन इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

इस घटना ने उन यात्रियों को चिंतित कर दिया है, जो वंदे भारत जैसी प्रीमियम सेवाओं से उच्च गुणवत्ता और बेहतर अनुभव की अपेक्षा रखते हैं। यात्रियों का कहना है कि जब एक अत्याधुनिक और हाई-टेक ट्रेन में भी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो आम ट्रेनों की हालत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस प्रकार की घटनाओं को दोहराया नहीं जाने दिया जाएगा और भविष्य में खाने की पैकेजिंग व गुणवत्ता पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। वहीं, कई यात्रियों और उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि संबंधित कैटरिंग कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया जाए और यात्रियों को उचित मुआवज़ा दिया जाए।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब रेलवे खानपान सेवाओं को निजीकरण की दिशा में बढ़ा रहा है और प्रीमियम ट्रेनों में ‘गुणवत्ता और सेवा’ का वादा किया जा रहा है। ऐसे में एक मामूली सी चूक भी रेलवे की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे पहले भी कई बार रेलवे के भोजन में कीड़े, प्लास्टिक, बाल, या लोहे के टुकड़े पाए जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन वंदे भारत जैसी प्रतिष्ठित ट्रेन में ऐसी लापरवाही को आमजन स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

रेलवे प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि खानपान सेवा में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई, तो यात्री अनुभव और भरोसे दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा। देश की सबसे तेज़ और आधुनिक मानी जाने वाली ट्रेन में इस तरह की घटना एक चिंताजनक संकेत है, जिससे सबक लेना जरूरी है।