स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
1 किलो से चूका गोल्ड, रिकॉर्ड के साथ लवप्रीत सिंह ने जीता सिल्वर; भारत का वेटलिफ्टिंग अभियान यादगार अंदाज में समाप्त
नई दिल्ली: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आठवें दिन भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने पुरुषों की +110 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम (176+212 किग्रा) वजन उठाया और बर्मिंघम 2022 के कांस्य पदक को सिल्वर में बदल दिया। हालांकि, स्वर्ण पदक उनसे महज 1 किलोग्राम दूर रह गया। न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटी ने कुल 389 किलोग्राम (166+223 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड अपने नाम किया। मुकाबले के दौरान लवप्रीत ने 176 किलोग्राम स्नैच के साथ नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।
शुरुआत से ही लवप्रीत पूरे आत्मविश्वास में नजर आए। स्नैच में रिकॉर्ड लिफ्ट लगाने के बाद उन्होंने बढ़त बना ली और क्लीन एंड जर्क के अधिकांश प्रयासों तक शीर्ष स्थान पर कायम रहे। उनकी लगातार सफल लिफ्टों ने भारतीय खेमे में स्वर्ण पदक की उम्मीदें जगा दी थीं। पांचवें प्रयास तक मुकाबले की कमान पूरी तरह उनके हाथ में दिखाई दे रही थी।
मुकाबले का सबसे रोमांचक पल तब आया, जब न्यूजीलैंड के अनुभवी वेटलिफ्टर डेविड लिटी ने अपने दूसरे-अंतिम क्लीन एंड जर्क प्रयास में 223 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इस लिफ्ट ने पूरे मुकाबले की तस्वीर बदल दी। लिटी ने कुल 389 किलोग्राम के साथ लवप्रीत को केवल 1 किलोग्राम से पीछे छोड़ दिया। इसके बाद उन्हें अंतिम प्रयास करने की भी जरूरत नहीं पड़ी और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
लवप्रीत सिंह के हिस्से रजत पदक जरूर आया, लेकिन उनका प्रदर्शन किसी चैंपियन से कम नहीं था। बर्मिंघम 2022 में कांस्य जीतने वाले भारतीय वेटलिफ्टर ने इस बार सिल्वर हासिल कर अपनी निरंतर प्रगति का शानदार प्रमाण दिया। रिकॉर्ड लिफ्ट और पूरे मुकाबले में दिखाई गई उनकी स्थिरता ने यह साबित किया कि वह बड़े मंच पर दबाव झेलते हुए बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं।
लवप्रीत के रजत पदक के साथ भारत का वेटलिफ्टिंग अभियान भी शानदार अंदाज में समाप्त हुआ। भारतीय भारोत्तोलकों ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया और लवप्रीत ने रिकॉर्ड के साथ इस अभियान को यादगार समापन दिया। भले ही स्वर्ण पदक सिर्फ 1 किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनका संघर्ष, जज्बा और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।







