नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह।
लिखित आश्वासन भी जरूरी, NTA अधिकारियों की छंटनी पर्याप्त नहीं
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना सरकार से किसी भी बैठक का कोई मतलब नहीं। पार्टी लिखित आश्वासन की भी मांग कर रही है।
शनिवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने पार्टी का रुख और कड़ा करते हुए कहा कि इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। उन्होंने जोर दिया कि बैठक में बनी सहमतियों को केवल मौखिक रूप से नहीं, बल्कि लिखित दस्तावेज के रूप में भी देना होगा।
रांका ने बताया कि सरकार के साथ हुई पिछली बैठक में कई कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई थी। कुछ बिंदुओं पर सैद्धांतिक सहमति भी बनी थी और सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले थे। पार्टी को उम्मीद थी कि इन सहमतियों का लिखित दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सके।
उन्होंने कहा, “बैठक में कई मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई और सैद्धांतिक सहमति भी बनी। हमें उम्मीद है कि सरकार उन सभी बिंदुओं पर लिखित सहमति देगी। लेकिन हमारी सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।”
मीडिया रिपोर्टों के हवाले से रांका ने कहा कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे। अगर सरकार का यही अंतिम रुख है, तो फिर आगे बैठक करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने साफ कहा कि सरकार को लिखित रूप में बताना चाहिए कि वह इस्तीफे की मांग पर क्या निर्णय ले रही है।
“यदि श्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सरकार हमें स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी दे। ऐसे में बार-बार बैठक करने का कोई मतलब नहीं है। हम अपनी आगे की रणनीति उसी के अनुसार तय करेंगे। केवल बातचीत और आश्वासन से छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा,” रांका ने कहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार लगातार टालमटोल का रवैया अपनाती रही, तो CJP को अपना रुख और अधिक सख्त करना पड़ेगा। पार्टी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन की अगली रणनीति तैयार करेगी।
NTA के 47 अधिकारियों की छंटनी पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को हटाए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि यह कदम अपने आप में पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निर्णय के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। अगर परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां हुई हैं, तो केवल अधिकारियों का तबादला या हटाना समाधान नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
CJP का कहना है कि देशभर के लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस और जवाबदेह कदम उठाए।
पार्टी ने तीन मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है—शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, बैठक में हुई सहमतियों का लिखित आश्वासन और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।
CJP ने दोहराया कि जब तक सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर स्पष्ट और लिखित जवाब नहीं देती, तब तक सरकार के साथ किसी भी नई बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है। पार्टी ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में वह अपनी आगे की रणनीति की घोषणा करेगी।







