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श्रीलंका ने उत्तरी क्षेत्र में पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भारत-श्रीलंका संयुक्त उपक्रम को दी मंजूरी

इंटरनेशनल डेस्क , रानी कुमारी

श्रीलंका सरकार ने अपने उत्तरी क्षेत्र में पवन ऊर्जा परियोजनाओं को जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण बिजली ट्रांसमिशन लिंक के निर्माण हेतु भारत-श्रीलंका संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश में नवीकरणीय ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, श्रीलंका के कैबिनेट प्रवक्‍ता नलिंदा जयातिस्‍सा ने बताया कि सरकार ने भारत के  ज्योति स्ट्रक्चर लिमिटेड और श्रीलंका की हेलेयस फेंटन्स लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम को यह परियोजना सौंपी है। 

इस परियोजना के तहत लगभग 28 किलोमीटर लंबी, 220 केवी डबल-सर्किट ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा, जो मन्नार ग्रिड सब-स्टेशन को मुल्लीकुलम ग्रिड सब-स्टेशन से जोड़ेगी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2.27 अरब श्रीलंकाई रुपये बताई गई है। 

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य उत्तरी श्रीलंका, विशेषकर मन्नार क्षेत्र में उत्पन्न पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। यह परियोजना “मुल्लीकुलम विंड पावर ट्रांसमिशन” पहल का हिस्सा है, जो देश में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।

टेंडर प्रक्रिया के तहत कुल पांच बोलियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें भारत-श्रीलंका संयुक्त उपक्रम को तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद सबसे उपयुक्त बोलीदाता के रूप में चुना गया। 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से श्रीलंका को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।