Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

षड़यंत्र से सफलता प्राप्त हो सकती मगर श्रेष्ठता नहीं: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: ईश्वर ने सृष्टि को अपने विवेक से सभी प्राणियों को ध्यान में रख कर उसका निर्माण किया है। वर्तमान सृष्टि के इंसान ब्लडप्रेशर के डर से नमक खाना छोड़ देते हैं,शुगर के डर से मीठा खाना छोड़ देते हैं, लेकिन भगवान के डर से दूसरों के हक का खाना क्यों नहीं छोड़ते।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता  बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। आपका शांत और स्थिर दिमाग जीवन के हर जंग का ब्रह्मास्त्र है,उम्र का मोड़ चाहे कोई भी हो,बस धडकनों में नशा जिंदगी जीने का होना चाहिए। एक लोटा जल और मन में हजारों छल तो कैसे होगा हर समस्या का हल,जो बोएंगे,वही तो पायेंगे। जल भले ही रोज चढ़ाएं,जितनी शक्ति विश्वास में होती है,उतनी ही शक्ति अन्धविश्वास में भी होती है। विश्वास और अन्धविश्वास के बीच का मुख्य अंतर एक है,विश्वास हमारे लिए मार्ग दर्शक बनता है,जबकि अन्धविश्वास हमें पथ भ्रष्ट करता है। परमात्मा को याद करने से मन उसी प्रकार शुद्ध और निर्मल हो जाता है,जैसे जंग लगे लोहे को बार बार रगड़ने से साफ हो जाता। जगत में लड़ाइयां क्यों होती हैं ? इसलिए कि विषयों से सुख की आशा है।मन में यह मोह है कि लड़कर मनमाना विषय प्राप्त करेंगे और फिर सुखी हो जाएंगे।षड़यंत्र से सफलता तो प्राप्त की जा सकती है, लेकिन श्रेष्ठता नहीं।श्रेष्ठता सदैव अच्छे गुणों से प्राप्त होती है और गुण ईश्वरीय होते हैं। आसमान को छू ना सके तो ना सही,लेकिन लोगों के दिल को छूने का आनन्द भी आसमान छूने से कम नहीं। समय और सम्पदा के बीच का सबसे बड़ा अंतर हमको हर क्षण ये भलीभांति ज्ञात है कि,हमारे पास कितनी सम्पदा है परंतु हम इस सत्य से पूर्णतया अनभिज्ञ है कि हमारे पास कितना समय है,अतः हमें सम्पदा के साथ समय का भी सदुपयोग करना चाहिए।संसार में घटना भले ही कुछ भी क्यों न हो ,पर उसमें सुख-दुःख का होना हमारी भावना पर निर्भर है।बुराई को सुनना,बुराई को चुनना जैसा ही है क्योंकि जब हम बुराई सुनना पसंद करते हैं,तो बुराई का प्रवेश हमारे विचारों के माध्यम से हमारे आचरण में स्वतः होने लगता है।जिसका मन बुरी भावनाओं को दूर रखता है,उसके सामने अपने-आप बुरी बातें बहुत कम आती हैं।जीवन में सुखी रहने के कई रास्ते है पर औरों से अधिक सुखी होने का कोई रास्ता नहीं।