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सत्य कर्म ही जीवन यात्रा के आभूषण हैं: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: जो मनुष्य अपनी उन्नति चाहता है,उसे चाहिए कि वह दूसरों में गुण देखने की आदत डाले।जब मनुष्यों में पराया दोष देखने की आदत पड़ जाती है,तब दोष हुए बिना भी उसे दूसरों में दोष दिखने लग जाते हैं।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता लायन बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।कलियुग का प्रधान शस्त्र है - कपट।कलियुग कपट के पीछे चलता है।पाप करते समय मनुष्य यह भूल जाता है कि इसका फल क्या मिलेगा।"कर्तव्य" और "कर्म" जिसके साथ है,बस समझें जीत उसके पास है, जहाँ सुकून मिले,वहाँ सिर झुका दिया करें,चाहे वह ईश्वर का दर हो या अपना घर। गाँव की छाँव हो या माँ का पाँव,गुरु का दरबार हो या गुरु का मंदिर,चार दिन की है जिंदगी, हँसी खुशी में काट लें। मत किसी का दिल दुखा,दर्द सबके बाँट ले,कुछ नहीं है साथ जाना एक नेकी के सिवा,कर भला होगा भला,गाँठ में ये बांध लें। इस पृथ्वी पर दान जैसी उत्तम क्रिया नहीं है, लोभ जैसा दूसरा कोई शत्रु नहीं है, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नहीं है और संतोष जैसा दूसरा कोई धन नहीं है। आप नश्वर है-अगर आप इस चीज के प्रति हर पल सचेत हैं,सिर्फ तभी आप वाकई जागरूक बन सकते हैं और जीवन के हर पल का आनंद ले सकते हैं।

मैं इस शरीर को चलने वाली आत्मा और मुझ आत्मा के पिता परमात्मा, इस सत्य को दिल से मान लेने से शक्ति बढ़ेगी। एक लालची आदमी को वस्तु भेंट कर संतुष्ट करें,एक कठोर आदमी को हाथ जोड़कर संतुष्ट करें,एक मूर्ख को सम्मान देकर संतुष्ट करें एक विद्वान आदमी को सच बोलकर संतुष्ट करें।एक अच्छा व्यक्ति जब संबंध निभाना बंद कर दे तो,समझ लेना चाहिए कि उसके स्वाभिमान को कहीं ना कहीं बहुत गहरी ठेस पहुँची है।जितना अधिक गहरा हो कुँआ,उतना मीठा जल मिलता है।जीवन के हर कठिन प्रश्न का जीवन से ही हल मिलता है,जब तक आपको अपने आप पर विश्वास नहीं है,तो आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते। भावना में भाव न हो भावना बेकार है,भावना में भाव हो तो भव से बेड़ापार है।भाव के भूखे प्रभु,बस भाव ही बस सार है,भाव से अर्पण करे तो पुष्प भी स्वीकार है।