स्टेट डेस्क, रानी कुमारी।
पटना। बिहार के सहरसा जिले के मॉडल स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को डिजिटल मीडिया और कंटेंट क्रिएशन की बारीकियां भी सिखाई जा रही हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने की तैयारी करने के साथ ही सोशल मीडिया की दुनिया को समझ रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक, रचनात्मकता और डिजिटल संचार के क्षेत्र में भी दक्ष बनाना है।
सहरसा स्थित सरस्वती विद्या निकेतन के मेधावी विद्यार्थी जेईई और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ इन्फ्लुएंसर बनने की बारीकियां भी सीख रहे हैं। विद्यार्थी वीडियो और ब्लॉगिंग के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे हैं। इस पहल से बच्चों को अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने, नए विचार प्रस्तुत करने और डिजिटल मंचों का उपयोग करने का अवसर मिल रहा है।
मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले कुछ विद्यार्थी ब्लॉगिंग के जरिए अपने विद्यालय की गतिविधियों और उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। वे अपने वीडियो में विद्यालय के गणित, कंप्यूटर और जीवविज्ञान प्रयोगशालाओं की जानकारी देते हुए वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं को प्रदर्शित कर रहे हैं। इससे दूसरे विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानने का अवसर मिलता है।
कंटेंट क्रिएशन के माध्यम से विद्यार्थियों में टीमवर्क और संवाद कौशल विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बच्चे मिलकर वीडियो तैयार करते हैं, विषयों का चयन करते हैं और जानकारी को सरल तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें योजना बनाने, तथ्यों को व्यवस्थित करने और अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने का अनुभव मिलता है। साथ ही, वे शिक्षकों से पाठ्यक्रम और पढ़ाने की शैली से जुड़ी जानकारी भी साझा कर रहे हैं।
डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच इस तरह की पहल विद्यार्थियों को तकनीक के रचनात्मक इस्तेमाल से परिचित करा सकती है। हालांकि, पढ़ाई के साथ कंटेंट क्रिएशन करते समय समय प्रबंधन, ऑनलाइन सुरक्षा, तथ्यात्मक जानकारी और सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल पर ध्यान देना भी जरूरी है। इससे विद्यार्थी डिजिटल मंचों का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए भी कर सकेंगे।
इस प्रकार, सहरसा के मॉडल स्कूलों में शिक्षा और डिजिटल कौशल को साथ लेकर चलने का प्रयास विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल सकता है। इससे वे पारंपरिक करियर विकल्पों की तैयारी के साथ मीडिया, संचार और डिजिटल रचनात्मकता की दुनिया से भी परिचित हो रहे हैं।







