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सुबह मुहूर्त छूटा तो अभिजीत में करें घटस्थापना

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।

शारदीय नवरात्र आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का सही समय और तरीका

नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि आज रविवार से शुरू हो गई है। सुबह का मुहूर्त छूटने वाले भक्त अब अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं।

आज मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का दिन है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना सबसे महत्वपूर्ण काम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह काम शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए प्रातःकाल का मुख्य मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक रहा। जो लोग इस समय में कलश नहीं स्थापित कर पाए, उनके लिए अभिजीत मुहूर्त का विकल्प उपलब्ध है। यह समय सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक का है।

आज का समय दोपहर के आसपास है। अभिजीत मुहूर्त अभी समाप्त होने के करीब है या समाप्त हो चुका है। इसलिए जो भक्त अभी भी कलश स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें जल्दी करना चाहिए। शहर के अनुसार समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है क्योंकि यह सूर्योदय पर निर्भर करता है। अपने इलाके के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।

इस साल अभिजीत मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रतिपदा तिथि सुबह से शाम तक चल रही है। लेकिन पूरा दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में बीत रहा है। शास्त्रों में इन दोनों को घटस्थापना के लिए अच्छा नहीं माना जाता। जब ये दोनों पूरे दिन रहे तो प्रातःकाल का मुहूर्त तो स्वीकार किया जाता है, लेकिन अभिजीत मुहूर्त को सबसे सुरक्षित माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त इन दोषों से मुक्त रहता है।

प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात करीब 9 बजकर 19 मिनट से शुरू हुई थी। यह 11 अक्टूबर की रात करीब 9 बजकर 30 से 32 मिनट तक रहेगी। घटस्थापना दिन में और प्रतिपदा के दौरान ही करनी चाहिए। रात में या अमावस्या के दिन यह काम नहीं किया जाता।

कलश स्थापना कैसे करें

पूजा का स्थान साफ करें। पूर्व या ईशान कोण बेहतर माना जाता है। वहां लाल कपड़ा बिछा दें। एक मिट्टी के बर्तन में साफ मिट्टी भरें। उसमें जौ के बीज बो दें और हल्का पानी छिड़क दें। जौ नौ दिनों तक उगते रहेंगे। इसे शुभ संकेत माना जाता है।

अब तांबे या पीतल का कलश लें। उसमें साफ जल भरें। गले पर मौली बांधें। कलश के मुंह पर आम के पांच पत्ते रखें। ऊपर लाल कपड़े में लपेटा नारियल रखें। अंदर सुपारी और सिक्का भी डाल सकते हैं। इस कलश को जौ वाली मिट्टी पर स्थापित करें।

पहले गणेश जी का स्मरण करें। फिर मां दुर्गा का आह्वान करें। दीपक जलाएं। अखंड ज्योत जलाने की परंपरा भी है। फूल, रोली और अक्षत चढ़ाएं। मां शैलपुत्री की पूजा करें और नवरात्रि का संकल्प लें।

नवरात्रि के दौरान ध्यान रखने वाली बातें

सात्विक भोजन रखें। प्याज, लहसुन, मांस और शराब से परहेज करें। जौ को रोज पानी देते रहें। पूजा स्थान को साफ रखें। अखंड ज्योत बुझने न दें। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी और इसी तरह आगे।

नवरात्रि के दौरान कई लोग व्रत रखते हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए ही व्रत करना चाहिए। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बीमार लोग डॉक्टर की सलाह लें।

 क्यों जरूरी है सही मुहूर्त

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि घटस्थापना गलत समय पर करने से देवी की कृपा नहीं मिलती। इसलिए समय का ध्यान रखना जरूरी है। अभिजीत मुहूर्त मध्याह्न के आसपास का छोटा समय होता है। यह लगभग 45 से 50 मिनट का होता है। इसमें किए गए काम शुभ माने जाते हैं।

शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। यह शरद ऋतु का पर्व है। पूरे देश में इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा होती है। घर-घर में कलश स्थापित किए जाते हैं। कई जगहों पर गरबा और डांडिया भी खेले जाते हैं।

आज के दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। मां शैलपुत्री हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं। वे शक्ति और स्थिरता की प्रतीक हैं। उनकी पूजा से घर में सुख-शांति आने की मान्यता है।

जो लोग अभी तक कलश स्थापित नहीं कर पाए हैं, वे जल्द से जल्द अभिजीत मुहूर्त में काम पूरा कर लें। समय निकल जाने के बाद दोपहर बाद या शाम को घटस्थापना नहीं करनी चाहिए।

नवरात्रि नौ दिनों तक चलेगी। महा अष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व होता है। उसके बाद विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को पड़ रहा है।

भक्तों को सलाह दी जाती है कि पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें। मुहूर्त के समय सामग्री खोजने में समय न लगे। घर के सभी सदस्य मिलकर पूजा करें तो अच्छा रहता है।

शारदीय नवरात्रि भक्ति और अनुशासन का पर्व है। सही समय पर कलश स्थापित करके नवरात्रि की शुरुआत शुभ मानी जाती है। मां दुर्गा सभी भक्तों पर कृपा करें।