स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले में एनसीएलटी की ओर से मंजूर किए गए रीपेमेंट प्लान को कई बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां चुनौती देने की तैयारी में हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील करने की बात कही है। इससे पहले एचडीएफसी बैंक भी फैसले को चुनौती देने की संभावना पर विचार कर रहा है।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने क्या कहा?
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की ओर से डॉ. सुभाष चंद्रा के खिलाफ दायर पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले में उसने केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस समेत अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर रीपेमेंट प्लान का विरोध किया था। बैंक ने एनसीएलटी के समक्ष भी अपनी दलील रखते हुए इस योजना को मंजूरी नहीं देने का अनुरोध किया था।
बैंक के अनुसार, इसके बावजूद कुछ निजी कर्जदाताओं के बहुमत वाले वोट के आधार पर एनसीएलटी ने रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी। अब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया इस फैसले को एनसीएलएटी में तत्काल चुनौती देने जा रहा है।
केनरा बैंक भी फैसले के खिलाफ
केनरा बैंक ने बताया कि उसने अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के साथ सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था। इस मामले में बैंक के पास 1.60 प्रतिशत वोटिंग शेयर था। वहीं, यूनियन बैंक के पास 0.76 प्रतिशत और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के पास 6.09 प्रतिशत वोटिंग शेयर था।
बैंक के मुताबिक, रीपेमेंट प्लान के पक्ष में अन्य निजी वित्तीय कर्जदाताओं के 80.81 प्रतिशत वोट मिले, जिसके आधार पर इसे मंजूरी मिली।
केनरा बैंक ने मामले में फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की थी, लेकिन उसके अल्पमत वोटिंग शेयर के कारण इस मांग पर विचार नहीं हो सका। बैंक ने कहा है कि वह एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील दाखिल कर रहा है।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस भी जाएगा NCLAT
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि उसने केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर सुभाष चंद्रा की ओर से प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था।
कंपनी के अनुसार, अन्य वित्तीय कर्जदाताओं के पक्ष में पड़े कुल 80.81 प्रतिशत वोट के आधार पर इस प्लान को मंजूरी मिली। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा है कि वह अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर तुरंत एनसीएलएटी में अपील दाखिल करेगी।
एचडीएफसी बैंक भी अपील की संभावना तलाश रहा
इस मामले में एचडीएफसी बैंक भी एनसीएलएटी जाने की संभावना पर विचार कर रहा है। बैंक ने गुरुवार को सीएनबीसी-टीवी18 को बताया था कि उसने एनसीएलटी में सेटलमेंट का विरोध किया था और रीपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था। अब बैंक एनसीएलएटी में अपील की संभावना तलाश रहा है।
एनसीएलटी से मंजूर रीपेमेंट प्लान के तहत करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के मंजूर दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को कुल 6.25 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। यानी कुल मंजूर दावों के मुकाबले रिकवरी करीब 0.028 प्रतिशत होगी और कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ेगा।
एचडीएफसी बैंक के अनुसार, इस मामले में उसका मंजूर दावा कुल मंजूर दावों का करीब 3.2 प्रतिशत था।
क्या है मामला?
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इसी सप्ताह सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। इसके तहत 22,006.57 करोड़ रुपये के मंजूर दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये मिलने हैं। इस समझौते के तहत कर्जदाताओं की रिकवरी करीब 0.03 प्रतिशत रहेगी, जबकि उनके दावों पर 99.97 प्रतिशत की कटौती होगी।
यह फैसला एनसीएलटी के सदस्य (न्यायिक) निलेश शर्मा ने लिया। मूल दो सदस्यीय पीठ के सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान पर विभाजित फैसले के बाद उन्हें तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था।
प्रस्ताव के मुताबिक, 6.25 करोड़ रुपये कर्जदाताओं में बांटे जाएंगे, जबकि 25 लाख रुपये दिवालियापन प्रक्रिया की लागत के लिए रखे गए हैं। रीपेमेंट प्लान को 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर रखने वाले कर्जदाताओं का समर्थन मिला था। अब बैंक और वित्तीय संस्थाएं इसी फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील करने जा रही हैं।







