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सुशासन की सफलता, प्रमोद सिंह की समस्या का समाधान

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम ऑनलाइन परिमार्जन पोर्टल के माध्यम से हुई सुधार की प्रक्रिया, अब संशोधित विवरण आम जनता और रैयत के लिए डिजिटल रूप से उपलब्ध।

पूर्वी चंपारण: बिहार सरकार द्वारा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया "बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम-2015" आज आम जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसी कड़ी में पूर्वी चम्पारण जिले के केसरिया अंचल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहाँ प्रशासनिक तत्परता और कानूनी अधिकार के प्रयोग से एक रैयत की जमाबंदी में सुधार कर उन्हें न्याय प्रदान किया गया।

क्या था पूरा मामला?

मामला केसरिया अंचल के रामपुर खजुरिया ग्राम निवासी प्रमोद सिंह (पिता-स्व0 राजदेव सिंह) से जुड़ा है। उन्होंने अपनी जमीन की जमाबंदी संख्या-2559 में खाता, खेसरा एवं रकबा के सुधार हेतु परिमार्जन पोर्टल पर आवेदन (सं0-250246892832407) दिया था। आवेदन के दो माह बीत जाने के बाद भी जब अंचल कार्यालय द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो हार मानकर उन्होंने बिचौलियों के चक्कर काटने के बजाय सरकार द्वारा प्रदत्त वैधानिक अधिकार का उपयोग किया।

प्रमोद सिंह ने अपनी शिकायत अनुमण्डलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, चकिया के समक्ष दर्ज कराई। अनुमण्डलीय स्तर से प्राप्त आदेश से संतुष्ट न होने पर उन्होंने हार नहीं मानी और जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के पास अपील दायर की।

प्रशासनिक सक्रियता और समाधान

जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंचलाधिकारी (CO), केसरिया को लोक प्राधिकार नामित किया और अविलंब निष्पादन प्रतिवेदन की माँग की। लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी की सख्ती और नियमित सुनवाई का असर यह हुआ कि अंचल कार्यालय ने त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की।

अंचलाधिकारी, केसरिया द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रतिवेदन के अनुसार, मौजा रामपुर खजुरिया (थाना नं0-35) के अंतर्गत जमाबंदी संख्या-2559 में वांछित सुधार (खाता, खेसरा और रकबा) की प्रक्रिया ऑनलाइन परिमार्जन पोर्टल के माध्यम से पूर्ण कर ली गई है। अब यह सुधरा हुआ विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।

'न्याय आपके द्वार' की अवधारणा हुई साकार

यह मामला इस बात का जीवंत प्रमाण है कि बिहार में अब नागरिकों को अपनी जायज समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों का समाधान "न्याय आपके द्वार" की अवधारणा को धरातल पर उतार रहा है।

 "बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम-2015 ने नागरिकों को वह शक्ति दी है जिससे वे बिना किसी बिचौलिए के सीधे प्रशासन से जवाबदेही तय कर सकते हैं। यह न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है, बल्कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करता है।"

प्रमोद सिंह जैसे हजारों नागरिकों का भरोसा इस तंत्र पर बढ़ना सुशासन की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जन समस्याओं के समाधान में कोताही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और हर नागरिक को समय पर न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।