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सोनम वांगचुक के अनशन पर सरकार घिरी, NCP-SP ने बताया लोकतंत्र की विफलता

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली। दिल्ली में चल रहे सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के सांसद अमर काले ने कहा कि सरकार के अहंकार और संवादहीनता के कारण प्रदर्शन लगातार लंबा खिंचता गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में बातचीत के बजाय सरकार ने प्रदर्शनकारियों की आवाज को नजरअंदाज किया।

अमर काले ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है, वे पूरी तरह जनहित और छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 20-22 दिनों से प्रदर्शन जारी है, लेकिन सरकार की ओर से किसी भी स्तर पर गंभीर पहल नहीं की गई। उनके मुताबिक यह किसी भी सरकार की बड़ी विफलता है कि इतने लंबे समय तक आंदोलन जारी रहने के बावजूद समाधान निकालने का प्रयास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं पर निर्भर करता है और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

एनसीपी-एसपी सांसद ने विशेष रूप से सोनम वांगचुक का जिक्र करते हुए कहा कि पद्मश्री से सम्मानित एक व्यक्ति 22 दिनों से राजधानी में अनशन पर बैठा है, लेकिन सरकार का कोई जिम्मेदार मंत्री या अधिकारी उनसे मिलने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते बातचीत करती और आंदोलनकारियों की बात सुनती, तो यह अनशन और प्रदर्शन इतने लंबे समय तक नहीं चलता। उनके अनुसार लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद है, लेकिन सरकार ने उसी से दूरी बना ली।

अमर काले ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने किसी तरह की हिंसा नहीं की, बल्कि पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक और छात्रों के अधिकारों की मांग करना कोई अपराध नहीं है। ऐसे मुद्दों पर आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक जब युवा शिक्षा और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर आंदोलन करते हैं और उनके साथ कठोर व्यवहार किया जाता है, तो इससे दुनिया के सामने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

अमर काले ने पेपर लीक समेत शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में अहंकार हावी है और संवेदनशील मुद्दों पर भी जिम्मेदार रवैया नहीं अपनाया जा रहा। उन्होंने कहा कि देश की जनता सरकार के कामकाज को देख रही है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।