हेल्थ डेस्क , रानी कुमारी
नई दिल्ली। आज की आधुनिक जीवनशैली में स्मार्टफोन का बढ़ता मोह और दफ्तरों से लेकर घरों तक एयर कंडीशनर (AC) का अत्यधिक प्रयोग हमारी आंखों की नमी छीन रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत के महानगरीय शहरों में 'ड्राई आई सिंड्रोम' (Dry Eye Syndrome) के मामलों में पिछले तीन वर्षों में 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित आईटी पेशेवर और छात्र हैं, जो दिन का 8 से 10 घंटा स्क्रीन के सामने बिताते हैं।
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या दो तरफा हमले के कारण बढ़ रही है। पहला कारण 'ब्लिंकिंग रेट' में कमी है। सामान्यतः एक व्यक्ति एक मिनट में 15-20 बार पलकें झपकाता है, लेकिन स्क्रीन पर एकाग्र होने पर यह दर घटकर महज 5-7 बार रह जाती है। इससे आंखों की ऊपरी सतह पर आंसू सूखने लगते हैं।दूसरा बड़ा कारण AC की कृत्रिम हवा है। एयर कंडीशनर हवा से नमी को सोख लेते हैं, जिससे वातावरण शुष्क हो जाता है। यह शुष्क हवा आंखों के प्राकृतिक आंसुओं को तेजी से वाष्पित कर देती है, जिससे आंखों में जलन, खुजली और कंकड़ जैसा महसूस होने लगता है।
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो ड्राई आई की समस्या केवल मामूली जलन तक सीमित नहीं रहती। अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार, "लगातार सूखापन रहने से कॉर्निया पर घाव हो सकते हैं और दृष्टि धुंधली हो सकती है। कई मामलों में आंखों की सुरक्षात्मक परत इतनी कमजोर हो जाती है कि संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।"
डॉक्टरों ने इस स्थिति से बचने के लिए 'डिजिटल हाइजीन' का पालन करने की सलाह दी है। इसके तहत '20-20-20' का फॉर्मूला सबसे कारगर माना गया है: हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद, कम से कम 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और पलकें झपकने की प्रक्रिया सामान्य होती है।
बचाव के मुख्य उपाय:
1.AC की सीधी हवा से बचें: ध्यान रखें कि AC या पंखे की हवा सीधी आपकी आंखों पर न लगे।
2.ह्यूमिडिफायर का प्रयोग: बंद कमरों में नमी बनाए रखने के लिए छोटे ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
3.हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी न होने दें, यह आंसुओं के निर्माण में सहायक है।
4.डॉक्टरी सलाह: बिना विशेषज्ञ के परामर्श के 'लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स' का उपयोग न करें, क्योंकि कुछ ड्रॉप्स में मौजूद प्रिजर्वेटिव आंखों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह हम अपनी त्वचा का ख्याल रखते हैं, उसी तरह डिजिटल उपकरणों और कृत्रिम वातावरण के बीच आंखों की नमी बरकरार रखना अब अनिवार्य हो गया है।







