नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2025 में सरकारी पंजीकरण के साथ 44 हजार नए स्टार्टअप जुड़े, जो स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत से अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक बढ़ोतरी है।
देश में अब कुल 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप हैं और करीब 125 यूनिकॉर्न, जो वैश्विक स्तर पर भारत को तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाते हैं। मोदी ने योजना की 10वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यह मिशन अब एक क्रांति बन चुका है, जहां स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन रहे हैं, आईपीओ लॉन्च कर रहे हैं और रोजगार पैदा कर रहे हैं।
जोखिम लेने की संस्कृति में बदलाव
मोदी ने जोर देकर कहा कि पहले जोखिम लेना हतोत्साहित किया जाता था, लेकिन आज यह मुख्यधारा का हिस्सा बन गया है। "मासिक सैलरी से आगे सोचने वाले अब सिर्फ स्वीकार्य नहीं, बल्कि सम्मानित हैं। जोखिम भरे विचार, जो कभी हाशिए पर थे, अब फैशनेबल हो गए हैं," उन्होंने कहा।
2016 में लॉन्च हुई स्टार्टअप इंडिया योजना का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और निवेश-आधारित विकास को सक्षम बनाना है। दस साल पहले देश में 500 से कम स्टार्टअप थे, जबकि 2014 में सिर्फ चार यूनिकॉर्न। आज ये आंकड़े भारत की स्टार्टअप क्रांति की कहानी बयां करते हैं।
फंड ऑफ फंड्स से 25 हजार करोड़ का निवेश
प्रधानमंत्री ने बताया कि स्टार्टअप्स के लिए बनाए गए फंड ऑफ फंड्स के जरिए 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है। यह योजना स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डीप टेक पर फोकस, नई योजना की तैयारी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि अप्रैल 2025 में मंजूर फंड ऑफ फंड्स 2.0 का फोकस डीप टेक पर होगा। 10 हजार करोड़ रुपये के कोष के साथ यह योजना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देगी।
"ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां देश की जरूरत है और जहां हम वैश्विक नेता बनना चाहते हैं," गोयल ने कहा। उन्होंने जोड़ा कि इन क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट तक पहुंचने में लंबा समय लगता है, इसलिए ज्यादा रिस्क कैपिटल उपलब्ध कराया जाएगा।
स्टार्टअप इंडिया ने न सिर्फ बड़े शहरों में, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उद्यमिता को बढ़ावा दिया है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ी है, जो देश की आर्थिक वृद्धि को नई दिशा दे रही है।







