नेशनल डेस्क, रानी कुमारी |
स्वदेशी ड्रोन तकनीक के विकास में देरी ठीक नहीं : वायु सेना प्रमुख
भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने देश में स्वदेशी मानव रहित प्रणालियों के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत को इस दिशा में देर नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, यूएवी और एंटी-ड्रोन तकनीक निर्णायक भूमिका निभाने वाली हैं, इसलिए देश को जल्द से जल्द स्केलेबल और अत्याधुनिक प्रणालियां विकसित करनी होंगी।
वायु सेना प्रमुख शुक्रवार को नई दिल्ली में सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर स्टडीज (CAPS) और आईआईएमआर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित “अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स एंड काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स” विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने आधुनिक युद्ध प्रणाली में तकनीकी नवाचार और समेकित संचालन की बढ़ती आवश्यकता पर भी जोर दिया।
एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने कहा कि ड्रोन तकनीक अब केवल भविष्य की कल्पना नहीं रह गई है, बल्कि यह आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई संघर्षों में मानव रहित प्रणालियों का प्रभाव साफ तौर पर देखा गया है और भारत को भी इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि केवल ड्रोन विकसित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके खिलाफ प्रभावी रक्षा प्रणाली यानी काउंटर-ड्रोन तकनीक तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। वायु सेना प्रमुख ने बताया कि आने वाले समय में युद्ध पारंपरिक तरीकों से हटकर तकनीक आधारित होंगे, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और मानव रहित प्रणालियों का महत्व लगातार बढ़ेगा।
उन्होंने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार और रक्षा संगठनों को मिलकर स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना चाहिए। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा तकनीक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में ड्रोन तकनीक का उपयोग निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, सीमा सुरक्षा और सैन्य अभियानों में तेजी से बढ़ा है। ऐसे में भारत के लिए स्वदेशी मानव रहित प्रणालियों का विकास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







