विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
न्यूयॉर्क। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले लगातार हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से कच्चे तेल का निर्यात हाल के हफ्तों में बढ़ा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां से तेल की आवाजाही अब युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की ओर से कुछ तेल टैंकरों को सुरक्षा उपलब्ध कराना निर्यात में तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल माना जा रहा है।
एक पश्चिमी सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, अगस्त की शुरुआत से ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर हर सप्ताह करीब 30 ड्रोन और 10 पोत रोधी मिसाइल हमले किए जा रहे हैं। अधिकारी ने गोपनीय आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है। पिछले 10 दिनों के दौरान कम से कम चार व्यापारिक जहाजों को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन हमलों में से कई अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके।
इन हमलों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से दक्षिणी तट पर हो रहे धमाकों के पीछे अपनी भूमिका की पुष्टि किए जाने की बात कही गई है। इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल का परिवहन जारी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देशों के जहाजों को अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा मिलने से उनकी आवाजाही संभव हो पा रही है।
कुछ तेल टैंकर ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर अमेरिकी नौसेना की ओर से बताए गए मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, कुछ जहाजों के अपने ट्रांसपोंडर बंद करके समुद्री मार्ग से गुजरने की जानकारी भी सामने आई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। लगातार हमलों के बीच सुरक्षित रास्ते के लिए सैन्य सुरक्षा और वैकल्पिक तरीकों पर निर्भरता से क्षेत्र में समुद्री व्यापार की स्थिति की गंभीरता का भी पता चलता है।
इस बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ाने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, क्षेत्र में तीसरा विमानवाहक पोत भेजा जा रहा है और करीब 10 हजार अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जा रही है। इससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ताकत में और इजाफा होगा। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच जी7 देशों ने भी तेल आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। जी7 देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय में चार महीने की अवधि में 10 करोड़ बैरल तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है। योजना के तहत शुरुआती 20 दिनों में बड़ी मात्रा में डीजल जारी किया जाएगा। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा की आपूर्ति बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता लाना है।
अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुक्रवार को डीजल की औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। इससे पहले 22 सितंबर को यह कीमत बढ़कर 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और जी7 की ओर से अतिरिक्त तेल बाजार में उतारने की योजना का असर आने वाले समय में ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।







