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हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी कप्तानी, विश्व कप जिताने से लेकर 17 साल के सफर की कहानी

स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।

नई दिल्ली: भारतीय महिला क्रिकेट में एक बड़े दौर का अंत हो गया है। हरमनप्रीत कौर ने भारतीय टीम की तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी है। 6 अक्टूबर 2026 को उन्होंने अपने फैसले का ऐलान किया। हालांकि, उन्होंने क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया है। वह आगे भी भारत के लिए खिलाड़ी के तौर पर खेलती रहेंगी।

हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन उनके सफर में हार और निराशा भी कम नहीं रही। सबसे बड़ी उपलब्धि 2025 में आई, जब उनकी कप्तानी में भारत ने पहली बार महिला वनडे विश्व कप जीता।

2009 में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर

8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में जन्मी हरमनप्रीत ने शुरुआती दिनों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेला। घरेलू क्रिकेट में पहचान बनाने के बाद उन्होंने 7 मार्च 2009 को पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया। उसी साल 11 जून को इंग्लैंड के खिलाफ T20I डेब्यू किया, जबकि टेस्ट क्रिकेट में पहला मैच 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला।

शुरुआत में वह बल्लेबाजी के साथ ऑफ स्पिन भी करती थीं, लेकिन जल्द ही उनकी पहचान आक्रामक बल्लेबाज के रूप में बन गई।

2012 में पहली कप्तानी और सीधे ट्रॉफी

हरमनप्रीत को पहली बार 2012 महिला टी20 एशिया कप के फाइनल में भारत की कप्तानी मिली। मिताली राज और झूलन गोस्वामी की गैरमौजूदगी में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने टीम की कमान संभाली और भारत ने 18 रन से फाइनल जीतकर खिताब अपने नाम किया।

2016 में उन्हें भारतीय T20I टीम की नियमित कप्तानी मिली।

2017 की 171 रन की पारी ने बदल दी पहचान

हरमनप्रीत के करियर का सबसे यादगार पल 2017 महिला वनडे विश्व कप का सेमीफाइनल रहा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 115 गेंदों पर नाबाद 171 रन बनाए। पारी में 20 चौके और 7 छक्के शामिल थे।

भारत ने 36 रन से मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई। हालांकि फाइनल में इंग्लैंड से नौ रन की हार मिली, लेकिन हरमनप्रीत की यह पारी महिला क्रिकेट की ऐतिहासिक पारियों में शामिल हो गई।

2018 में भारत की पहली T20I महिला शतकवीर

2018 महिला T20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ हरमनप्रीत ने 51 गेंदों पर 103 रन बनाए। वह T20 इंटरनेशनल में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनीं।

इसके बाद 2020 में उनकी कप्तानी में भारत T20 विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार गया।

2022 के बाद तीनों फॉर्मेट की कप्तान

मिताली राज के संन्यास के बाद 2022 में हरमनप्रीत को वनडे और टेस्ट की भी पूर्णकालिक कप्तानी मिली। उसी साल भारत ने महिला एशिया कप जीता। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने रजत पदक जीता।

2023 में उनकी कप्तानी में भारत ने एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट का पहला स्वर्ण पदक जीता। इसी साल भारत ने घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट जीत भी दर्ज की।

2025 में पूरा हुआ सबसे बड़ा सपना

हरमनप्रीत की कप्तानी का सबसे बड़ा पड़ाव 2025 महिला वनडे विश्व कप रहा।

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत के 339 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए हरमनप्रीत ने 89 रन बनाए और जेमिमा रोड्रिग्स के साथ 167 रन की साझेदारी की। भारत ने मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई।

फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारत ने पहली बार महिला वनडे विश्व कप जीता। इस ऐतिहासिक टीम की कप्तान हरमनप्रीत थीं।

2017 में फाइनल हारने वाली हरमनप्रीत ने आठ साल बाद भारत को उसी टूर्नामेंट का चैंपियन बनाया।

2026 में कप्तानी का अंत भी खिताब के साथ

2026 एशियन गेम्स में भारत ने श्रीलंका को 147 रन से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह एशियन गेम्स में भारत का लगातार दूसरा महिला क्रिकेट गोल्ड था।

इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को हरमनप्रीत ने तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया।

हरमनप्रीत के नाम कई बड़े रिकॉर्ड

हरमनप्रीत ने भारत के लिए 5 टेस्ट, 51 वनडे और 155 T20I में कप्तानी की। उनकी कप्तानी में भारत ने क्रमशः 4 टेस्ट, 30 वनडे और 93 T20I मैच जीते।

2026 में वह 200 T20I मैच खेलने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर बनीं। इसी साल वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ी भी बनीं।

उन्हें 2017 में अर्जुन पुरस्कार और 2023 में Wisden Cricketer of the Year सम्मान मिला।

कप्तानी गई है, क्रिकेट नहीं

हरमनप्रीत का कप्तानी सफर जीत, हार, रिकॉर्ड और आलोचनाओं से भरा रहा। 2017 और 2020 के विश्व कप फाइनल की हार से लेकर 2025 की ऐतिहासिक विश्व कप जीत तक उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट के कई अहम दौर देखे।

अब कप्तान की भूमिका किसी और के पास होगी, लेकिन हरमनप्रीत खिलाड़ी के तौर पर टीम के साथ रहेंगी।

17 साल पहले पाकिस्तान के खिलाफ शुरू हुआ सफर अब एक नए मोड़ पर पहुंचा है। कप्तानी का अध्याय खत्म हुआ है, लेकिन हरमनप्रीत कौर की क्रिकेट कहानी अभी बाकी है।