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हाईटेक जालसाजी का 'द एंड' नेपाल तक फैला था तस्करी का काला साम्राज्य

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

मोतिहारी पुलिस के 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' ने बिगाड़ा शातिरों का 'पंचिंग गेम'

पूर्वी चम्पारण: जब अपराध की दुनिया में शातिर दिमाग और अत्याधुनिक तकनीक का मेल होता है, तो वह कानून के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। लेकिन मोतिहारी की रघुनाथपुर पुलिस ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि एक ऐसे अंतरजिला वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पलक झपकते ही गाड़ियों की 'कुंडली' बदलने में माहिर थे।

आधी रात का शिकार, फिल्मी अंदाज में बदल देते थे पहचान

यह गिरोह कोई साधारण चोरों की टोली नहीं थी। इनका काम करने का तरीका किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था। गिरोह के सदस्य रात के सन्नाटे में घरों के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो, बोलेरो और मैजिक जैसे कमर्शियल वाहनों को अपना निशाना बनाते थे। गाड़ी चोरी करने के बाद असली खेल शुरू होता था 'पंचिंग' का। अपराधी अत्याधुनिक मशीनों से गाड़ियों के इंजन और चेचिस नंबर को इस सफाई से बदलते थे कि पुलिस की सामान्य चेकिंग में इन्हें पकड़ना नामुमकिन हो जाता था। कागजों पर चोरी की गाड़ी पूरी तरह 'क्लीन' दिखने लगती थी।

जब HHD मशीन के आगे फेल हुई अपराधियों की चालाकी

रघुनाथपुर थानाध्यक्ष धनंजय कुमार को मिली एक गुप्त सूचना ने इस गिरोह की उल्टी गिनती शुरू कर दी। पुलिस ने जब रघुनाथपुर ग्राम में छापेमारी की, तो वहां से एक सफेद बोलेरो और एक मैजिक बरामद हुई। गाड़ियां देखने में बिल्कुल सामान्य थीं, लेकिन थानाध्यक्ष के अनुभव और संदेह ने जांच का रुख मोड़ दिया।
पुलिस ने तकनीकी टीम को बुलाया और HHD (Hand Held Device) मशीन से जांच शुरू की। जैसे ही मशीन ने डेटा स्कैन किया, अपराधियों के झूठ के महल ढह गए। मशीन ने खुलासा किया कि गाड़ियों पर दिख रहे नंबर फर्जी थे और उन्हें मूल नंबरों को मिटाकर बड़ी सफाई से पंच किया गया था। 

अपराधी तकनीक का सहारा ले रहे थे, लेकिन हमारी सतर्कता और आधुनिक उपकरणों (HHD) ने उनके फर्जीवाड़े को बेनकाब कर दिया।" धनंजय कुमार, थानाध्यक्ष

नेपाल कनेक्शन: तस्करी के लिए होता था इस्तेमाल
पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इन चोरी की गाड़ियों का इस्तेमाल सिर्फ बेचने के लिए नहीं, बल्कि नेपाल और पड़ोसी जिलों में शराब व मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जा रहा था। पहचान बदल जाने के कारण ये गाड़ियां पुलिस की रडार से बाहर रहती थीं, जिससे तस्करी का धंधा बेखौफ चल रहा था।

पुलिस की गिरफ्त में गिरोह के 'मोहरे'

पुलिस ने इस सटीक कार्रवाई में गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को दबोचा है:

 विकेश कुमार यादव (डुमरियाघाट) मास्टरमाइंड के करीबियों में शामिल।
 
मोहम्मद रहमान (रामपुर खजुरिया)रेकी और लॉजिस्टिक्स का एक्सपर्ट।
 
बुलेट राउत (छतौनी) ठिकाने और नेटवर्क उपलब्ध कराने वाला मददगार 

पुरानी गाड़ी खरीदने वाले जरूर पढ़ें

इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा बेची गई पुरानी गाड़ियों की तलाश कर रही है। थानाध्यक्ष ने आम जनता को चेतावनी दी है कि पुरानी गाड़ी खरीदते समय सिर्फ कागजों पर भरोसा न करें। इंजन और चेचिस नंबर की प्रमाणिकता किसी विश्वसनीय मैकेनिक या तकनीकी विशेषज्ञ से जरूर जांच लें, वरना आप भी अनजाने में किसी बड़े कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। छापेमारी अभियान में एएसआई शत्रुंजीत यादव अशरफ खान, रघुनाथपुर थाने के सशस्त्र बल शामिल थे।