नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नयी दिल्ली, भारतीय जनमानस में जागरूकता, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक परिवर्तन की सशक्त वाहक रही हिन्दी पत्रकारिता अपनी गौरवशाली 200 वर्षीय यात्रा के ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंच गई है। इस महत्वपूर्ण अवसर को स्मरणीय बनाने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) और भोपाल स्थित एक समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में यहां शनिवार और रविवार को “हिन्दी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव हिन्दी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा, उसके योगदान और विकास यात्रा को समर्पित होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ 30 मई को अपराह्न चार बजे आईजीएनसीए परिसर के समवेत सभागार में किया जाएगा। दो दिवसीय इस आयोजन में देशभर से पत्रकारिता, साहित्य, मीडिया, शिक्षा और संस्कृति जगत से जुड़े अनेक विद्वान, शोधकर्ता, संपादक, लेखक तथा मीडिया कर्मी भाग लेंगे। आयोजन का उद्देश्य हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की उपलब्धियों, संघर्षों और समाज निर्माण में उसकी भूमिका को रेखांकित करना है।
महोत्सव के दौरान हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर विशेष स्मारक डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण का लोकार्पण किया जाएगा। यह प्रकाशन हिन्दी पत्रकारिता की दीर्घ और प्रेरणादायी यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का प्रतीक माना जा रहा है। साथ ही पत्रकारिता के क्षेत्र में उसके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जाएगा।
कार्यक्रम में ‘हिन्दी पत्रकारिता : 200 साल की महागाथा’ नामक स्मारक ग्रंथ का भी विमोचन किया जाएगा। इस ग्रंथ में हिन्दी पत्रकारिता के विकासक्रम, विभिन्न कालखंडों, प्रमुख घटनाओं, चुनौतियों तथा उल्लेखनीय उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसके माध्यम से पाठकों और शोधार्थियों को हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा का व्यापक परिप्रेक्ष्य उपलब्ध होगा।
आयोजन के अंतर्गत एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों के दौरान प्रकाशित प्रमुख समाचारपत्रों और पत्रिकाओं की विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही उन युगनिर्माता संपादकों और पत्रकारों के चित्र भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे, जिन्होंने अपने लेखन, विचारों और संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान की और हिन्दी पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आयोजकों के अनुसार यह महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने, उसके योगदान का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों को उससे परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम के माध्यम से पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, लोकतंत्र में उसकी भूमिका तथा समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
हिन्दी पत्रकारिता ने पिछले दो सौ वर्षों में देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक उसकी सहभागिता उल्लेखनीय रही है। द्विशताब्दी महोत्सव इसी गौरवपूर्ण परंपरा का उत्सव है, जो हिन्दी पत्रकारिता के समृद्ध अतीत, सशक्त वर्तमान और संभावनाओं से भरे भविष्य को एक मंच पर प्रस्तुत करेगा।







