विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
रियाद। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के साथ जारी संघर्ष अब व्यापक क्षेत्रीय टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। मक्का और मदीना को निशाना बनाकर किए गए हूती हमलों के बाद सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने अपने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। समझौते के तहत तीनों देशों ने सऊदी अरब में अपनी सैन्य ताकत और रक्षा क्षमताओं की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने का फैसला लिया है।
मक्का डिफेंस अलायंस की आपात बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया कि समझौते के सदस्य देशों में से किसी एक पर होने वाला सशस्त्र हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इस व्यवस्था के तहत किसी भी सदस्य देश की सुरक्षा को होने वाले खतरे का जवाब सामूहिक रूप से देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। बैठक में सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर तत्काल सामूहिक कदम उठाने पर सहमति बनी।
तुर्किए के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भी बैठक के दौरान लिए गए फैसलों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की रक्षा और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने पर सहमति बनी है। वहीं, सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने बताया कि गठबंधन ने हूती हमलों के जवाब में सामूहिक रोकथाम के उपाय शुरू कर दिए हैं। इस फैसले के साथ तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को जमीन पर लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
तनाव बढ़ने की प्रमुख वजह मदीना में स्थित एक बिजली वितरण केंद्र पर हुआ हूती हमला बताया गया है। यह केंद्र पैगंबर की मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है। पवित्र शहर को निशाना बनाए जाने की कोशिश पर सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। तीनों देशों ने दोहा और रियाद में हुई बैठकों के दौरान दोहराया कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को होने वाला कोई भी खतरा तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा माना जाएगा।
इस बीच सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन यमन डॉन’ नाम से व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया है। यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने अभियान की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सना को हूती नियंत्रण से मुक्त कराना और उनके तख्तापलट को समाप्त करना है। अभियान के तहत हूती ठिकानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जा रही है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की के मुताबिक, करीब 100 लड़ाकू विमानों ने सरकारी बलों के समर्थन में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में हूती विद्रोहियों के सैकड़ों ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया है। इसके अलावा सऊदी समर्थित बलों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण धुबाब, बाब और हदीद शहरों पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इन इलाकों पर दोबारा कब्जा मिलने से हूती विद्रोहियों की सैन्य और रणनीतिक स्थिति पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
यह संघर्ष ऐसे समय में और गंभीर हुआ है जब हूती विद्रोहियों ने हाल में लाल सागर के तटीय इलाकों और मोखा द्वीप पर कब्जा कर लिया था। इन इलाकों पर नियंत्रण मिलने के बाद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में उनका प्रभाव बढ़ गया था। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और इसके जरिए दुनिया का करीब 12 प्रतिशत समुद्री व्यापार गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव न केवल यमन और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा बल्कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग के लिए भी चुनौती बन गया है।







