विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए हूती लड़ाकों ने मंगलवार को एक बार फिर राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर मिसाइल हमला किया। हालांकि, हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही बंद होने के कारण किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सऊदी अरब की ओर से इस हमले की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं की गई है। हूती विद्रोहियों ने खामिस मुशैत स्थित सऊदी वायुसेना अड्डे पर भी हमला करने का दावा किया है। इसके अलावा, उन्होंने सऊदी अरब के सीमावर्ती शहरों को भी निशाना बनाया है।
लगातार हो रहे हमलों के बीच यमन में भी हूती लड़ाकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, वे देश के तीसरे सबसे बड़े शहर तैज को चारों ओर से घेरने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इस शहर पर सऊदी अरब समर्थित सरकारी सेना का नियंत्रण है, लेकिन हूती लड़ाके इसे अपने कब्जे में लेने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच, ईरान ने हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा है।
लगातार मिसाइल हमलों के कारण रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इस सप्ताह, यानी 18 अक्टूबर तक बंद रह सकता है। बताया गया है कि पिछले सात दिनों के दौरान हवाई अड्डे को छह हवाई हमलों का सामना करना पड़ा है। शनिवार को हुए हमले में 13 यात्रियों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद हवाई अड्डे को बंद करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद सऊदी अरब के दूसरे सबसे व्यस्त जेद्दा हवाई अड्डे पर भी सुरक्षा कारणों से अधिकांश उड़ानों का संचालन रोक दिया गया है। लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात का असर अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर भी पड़ रहा है। भारतीय विमानन कंपनियों एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर सहित अन्य कंपनियों ने 17 अक्टूबर तक सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें निलंबित रखने का निर्णय लिया है। इससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और हवाई परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
सऊदी अरब के लिए उड़ानें रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों की सूची में मंगलवार को इतिहाद एयरवेज और कतर एयरवेज भी शामिल हो गए। वहीं, एयर फ्रांस-केएलएम सहित कुछ अन्य कंपनियों ने अक्टूबर के अंत तक अपनी सेवाएं स्थगित रखने के संकेत दिए हैं। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण बड़ी संख्या में विमानन कंपनियों द्वारा उड़ानें रोकने से सऊदी अरब के विमानन क्षेत्र को गंभीर नुकसान होने की आशंका है। हाल के वर्षों में देश ने हवाई परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों के कारण इन क्षेत्रों की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उड़ानों के निलंबन से न केवल यात्रियों की यात्रा योजनाएं बाधित हो रही हैं, बल्कि देश में पर्यटन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। यदि सुरक्षा की स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता है, तो उड़ानों पर लगी पाबंदियां और लंबे समय तक जारी रह सकती हैं।
सऊदी अरब पर हवाई हमले करने के साथ-साथ हूती लड़ाके यमन में सरकारी सेना के खिलाफ भी भीषण जमीनी संघर्ष कर रहे हैं। ताजा हालात में यमन की सरकारी सेना के सामने अपने नियंत्रण वाले इलाकों को बचाने की चुनौती बढ़ गई है। सरकारी सेना ने पहले अपने हाथों से निकल चुके समुद्री क्षेत्रों को दोबारा हासिल करने के लिए अभियान चलाने का दावा किया था, लेकिन अब उसके लिए देश के तीसरे सबसे बड़े शहर तैज की सुरक्षा करना मुश्किल होता जा रहा है। हूती लड़ाके लगातार इस शहर की ओर बढ़ रहे हैं और इसकी घेराबंदी मजबूत कर रहे हैं। आशंका है कि यदि विद्रोही शहर के आसपास के रास्तों पर अपना नियंत्रण बढ़ाने में सफल हो जाते हैं, तो तैज का दूसरे शहरों से संपर्क पूरी तरह कट सकता है। इससे वहां रहने वाले लोगों के लिए भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
तैज की घेराबंदी से शहर में रहने वाले करीब दस लाख लोगों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल है। पहाड़ों से घिरे इस शहर से बाहर निकलना पहले ही आसान नहीं है और जारी संघर्ष के कारण लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना और कठिन होता जा रहा है। करीब 15 वर्षों से गृहयुद्ध का सामना कर रहे यमन के लोगों को आशंका है कि उन्हें एक बार फिर लंबे समय तक किसी इलाके में फंसकर बुनियादी सुविधाओं की कमी झेलनी पड़ सकती है। लगातार संघर्ष, रास्तों के बंद होने और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को डर है कि यदि हूती लड़ाकों ने शहर की घेराबंदी और कड़ी कर दी, तो उन्हें बाहर से मदद मिलना भी मुश्किल हो सकता है।
तैज के निवासियों के लिए मौजूदा स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि वे वर्ष 2014 में भी इसी तरह के हालात का सामना कर चुके हैं। उस समय शहर में संघर्ष और घेराबंदी के कारण लोगों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। पुराने अनुभवों को देखते हुए इस बार भी स्थानीय लोगों ने एहतियात बरतनी शुरू कर दी है। शहर में रहने वाले लोग भोजन और अन्य जरूरी वस्तुओं का भंडारण कर रहे हैं, ताकि संघर्ष बढ़ने या संपर्क मार्ग बंद होने की स्थिति में कुछ समय तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकें। लगातार बढ़ती घेराबंदी ने लोगों के बीच एक बार फिर लंबे संकट की आशंका पैदा कर दी है। एक ओर सऊदी अरब के हवाई अड्डों और सीमावर्ती इलाकों पर हमलों से सुरक्षा व्यवस्था तथा विमान सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर यमन में तैज पर बढ़ते दबाव ने आम नागरिकों के सामने सुरक्षित रहने और जरूरी सामान जुटाने की गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।







