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होर्मुज तनाव के बीच ओपेक देशों ने बढ़ाया तेल उत्पादन

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

लंदन: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी अनिश्चितता के बीच ओपेक प्लस समूह के प्रमुख सदस्य देशों ने लगातार चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस फैसले को वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और संभावित आपूर्ति संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद तेल उत्पादक देशों का यह निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत प्रदान कर सकता है।

ओपेक समूह के प्रमुख सदस्य देशों सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एक वर्चुअल बैठक के दौरान वैश्विक बाजार की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में ऊर्जा मांग, आपूर्ति संतुलन, उत्पादन क्षमता और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद सदस्य देशों ने उत्पादन बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की।

विश्लेषकों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी थी, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि तेल उत्पादन बढ़ाने का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को अत्यधिक बढ़ने से रोकना है। यदि उत्पादन में वृद्धि नहीं की जाती तो संभावित आपूर्ति बाधाओं के कारण वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ सकता था। ओपेक देशों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में संतुलित उत्पादन नीति अपनाना आवश्यक है।

बैठक में शामिल देशों ने यह भी संकेत दिया कि वे वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी उत्पादन नीति में बदलाव किया जा सकता है। इसके साथ ही सदस्य देशों ने ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ओपेक का यह फैसला तेल आयात करने वाले देशों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। इससे ऊर्जा आपूर्ति सुचारू रहने की संभावना बढ़ेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित दबाव कम होगा। आने वाले दिनों में निवेशकों और ऊर्जा बाजार की निगाहें ओपेक की अगली रणनीति तथा पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी रहेंगी।