लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: जीवन केवल सुख-सुविधाओं का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार, संस्कार, विचार और कर्मों की निरंतर परीक्षा भी है। हम जीवन में जिन लोगों के साथ भलाई करते हैं, उनसे हमेशा अच्छाई मिले, यह आवश्यक नहीं।
कई बार हम जहाँ प्रेम, विश्वास और सहयोग का बीज बोते हैं, वहीं से निराशा और बुराई भी प्राप्त होती है। ऐसे समय में निराश होने के बजाय हमें यह समझना चाहिए कि हर भूमि अच्छी खेती के योग्य नहीं होती।
उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
घमंड मनुष्य को कुछ समय के लिए ऊँचा अवश्य उठा सकता है, लेकिन उसका अंत हमेशा पतन में होता है। इसलिए जीवन में पद, प्रतिष्ठा, धन या शक्ति का अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता और सद्भाव होना चाहिए। वास्तविक महानता ऊँचा उठने में नहीं, बल्कि ऊँचाई पर पहुँचकर भी दूसरों के प्रति विनम्र बने रहने में है।
विडंबना यह है कि लोग अक्सर धोखा गलत व्यक्ति से खाते हैं और उसका बदला किसी अच्छे व्यक्ति से लेते हैं। हमें यह समझना होगा कि किसी एक व्यक्ति के गलत व्यवहार के कारण पूरी मानवता पर अविश्वास करना उचित नहीं है। शुक्र है कि पाप और अपराध की कोई गंध नहीं होती, अन्यथा शायद इस संसार में कोई व्यक्ति दूसरे के पास खड़ा होने का साहस ही न करता।
सत्य बोलने का साहस भी आवश्यक है
दुश्मन बनाने के लिए हमेशा लड़ाई करना आवश्यक नहीं होता। कभी अपने अधिकार के लिए आवाज उठाकर देखिए, कभी सत्य बोलकर देखिए—कई ऐसे लोग सामने आ जाएंगे, जो आपके सत्य से असहज हो जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हमें सत्य का मार्ग छोड़ देना चाहिए। सत्य कभी-कभी अकेला अवश्य होता है, लेकिन उसकी शक्ति सबसे बड़ी होती है।
जीवन में किसी व्यक्ति से असहमति होना स्वाभाविक है। विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन असहमति के बावजूद दूसरे व्यक्ति के प्रति आदर और सम्मान बनाए रखना हमारे व्यक्तित्व और संस्कारों की पहचान है। सभ्य समाज वही है, जहाँ विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन सम्मान बना रहता है।
किसी के चेहरे की मुस्कान बनिए
यदि जीवन में किसी को प्रसन्न करने का अवसर मिले तो उसे अपने स्वार्थ के कारण मत गंवाइए। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। वास्तव में वे लोग बड़े भाग्यशाली होते हैं, जो किसी के दुख को कम करने और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का कारण बनते हैं।
आज मनुष्य ने अपनी पहचान को जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और अन्य भेदों में बाँट लिया है। सच्चाई यह है कि जब मनुष्य अपने भीतर की इंसानियत को बड़ा नहीं बना पाया, तब उसने जाति और धर्म को बड़ा बना दिया। जबकि मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान उसकी मानवता होनी चाहिए।
दूसरों के दर्द को समझना सीखें
एक कवि की भावपूर्ण पंक्तियाँ जीवन की इसी सच्चाई को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करती हैं—
समझ न सको यदि किसी के हालात,
तो उसका उपहास मत करना।
बन न सको यदि किसी के घाव का मरहम,
तो उसे और दर्द मत देना।
उलझा हुआ है हर व्यक्ति अपनी-अपनी समस्याओं में,
बन न सको यदि किसी का सहारा,
तो उसकी परेशानियाँ और मत बढ़ाना।
इन पंक्तियों में मानवता का गहरा संदेश छिपा है। हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी संघर्ष से गुजर रहा है। इसलिए किसी के बाहरी व्यवहार या परिस्थिति को देखकर उसके जीवन का निर्णय कर देना उचित नहीं है। यदि हम किसी की सहायता नहीं कर सकते, तो कम से कम उसके दुख को बढ़ाने का कारण भी न बनें।
मीठी बातें हमेशा सच्चे संबंध का प्रमाण नहीं
किसी व्यक्ति की मीठी बातों का अर्थ यह आवश्यक नहीं कि वह आपको वास्तव में विशेष मानता है। कई बार लोग अपने स्वार्थ और लाभ के लिए भी मीठे शब्दों का सहारा लेते हैं। इसलिए केवल शब्दों पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और कर्मों पर विश्वास करना चाहिए।
किसी का दिल दुखाने के बाद दिखाई गई सहानुभूति और लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बाद दिखाई गई अहमियत का महत्व बहुत कम रह जाता है। सच्ची संवेदना वही है, जो समय पर दिखाई जाए और सच्ची अहमियत वही है, जो आवश्यकता के समय साथ खड़े होकर महसूस कराई जाए।
जीवन बहुत छोटा है। इसलिए नफरत के लिए समय नष्ट करने के बजाय प्रेम बाँटें, दूसरों को गिराने के बजाय उन्हें उठाने का प्रयास करें और जहाँ संभव हो, वहाँ किसी के जीवन में आशा और मुस्कान का प्रकाश बनें।
अंततः मनुष्य की पहचान उसके धन, पद, जाति या प्रतिष्ठा से नहीं होती। उसके कर्म, व्यवहार, संस्कार और इंसानियत ही उसकी वास्तविक पहचान हैं।
इंसानियत जीवित रहेगी तो समाज जीवित रहेगा,
संस्कार जीवित रहेंगे तो संबंध जीवित रहेंगे, और प्रेम जीवित रहेगा तो मानवता जीवित रहेगी।







