विदेश डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) के समीकरणों को पूरी तरह बदल देने वाली एक ऐतिहासिक घटना में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन की पुष्टि हुई है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, खामेनेई की मौत तेहरान स्थित उनके कार्यालय और सैन्य ठिकानों पर किए गए भारी हवाई हमलों के दौरान हुई। बताया जा रहा है कि यह हमला अमेरिका और इजरायल द्वारा मिलकर किया गया था, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' (Operation Epic Fury) का नाम दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए इसे ईरानी जनता के लिए अपने देश को वापस पाने का एक बड़ा अवसर बताया है।
खामेनेई के साथ-साथ उनके परिवार के कुछ सदस्यों और ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के भी मारे जाने की खबर है। इस घटना के बाद ईरान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है और अगले सात दिनों तक सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर आसीन थे और उन्हें देश का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था। उनके निधन से न केवल ईरान के भीतर नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज हो गई है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले को "कायराना" बताते हुए बदला लेने की कसम खाई है। जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली क्षेत्रों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागने शुरू कर दिए हैं। वर्तमान में ईरान का शासन एक अंतरिम परिषद संभाल रही है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। हवाई मार्ग पूरी तरह बाधित हो गए हैं और भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। यह घटना आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और तेल की कीमतों पर गहरा असर डाल सकती है।







