एंटरटेनमेंट डेस्क, मुस्कान कुमारी।
मुंबई। 'धुरंधर' की सफलता के बाद रणवीर सिंह के 'डॉन 3' से अचानक बाहर होने पर फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट ने 40 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। क्रिएटिव डिफरेंसेज का हवाला देकर रणवीर के बाहर होने से प्रोडक्शन हाउस को भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब एक्टर से करने की मांग की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर ने स्क्रिप्ट से नाखुशी जताते हुए प्रोजेक्ट छोड़ दिया, जबकि एक्सेल का कहना है कि प्री-प्रोडक्शन रणवीर की हरी झंडी के बाद ही शुरू हुआ था। फैक्ट चेक से पुष्टि हुई कि यह विवाद वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट पर आधारित है, जो कई प्रमुख मीडिया आउटलेट्स में छपी है—रणवीर की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (पीजीआई) मध्यस्थता कर रही है।
प्रोडक्शन हाउस में कटौती, नुकसान का आंकड़ा चौंकाने वाला
एक्सेल ने रणवीर के बाहर होने के बाद कई डिपार्टमेंट हेड्स को नौकरी से निकाल दिया और उन्हें बाहर काम तलाशने को कहा। अनुमानित 40 करोड़ का नुकसान प्री-प्रोडक्शन खर्चों से जुड़ा बताया जा रहा है। एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, "रणवीर ने स्क्रिप्ट में बदलाव मांगे, लेकिन फाइनल ड्राफ्ट उन्हें पसंद नहीं आया। एक्सेल का मानना है कि एक्टर की सहमति के बिना इतना निवेश नहीं होता।"
दोनों पक्षों के बीच लंबी बैठक हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अब पीजीआई इस मामले को सुलझाने की कोशिश में जुटी है, ताकि विवाद और न फैले। याद रहे, 2025 में अक्षय कुमार और परेश रावल के बीच 'हेरा फेरी 3' से रावल के बाहर होने पर भी 25 करोड़ का हर्जाना मांगा गया था—यह केस कोर्ट तक पहुंचा था।
रणवीर की सफाई: कोई हर्जाना नहीं देना
रणवीर का पक्ष साफ है कि उन्हें कोई हर्जाना चुकाने की बाध्यता नहीं है। 'धुरंधर' की भारी सफलता के बाद एक्टर अब 'धुरंधर: पार्ट 2' पर फोकस कर रहे हैं, जो 19 मार्च 2026 को थिएट्रिकल रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म में रणवीर का किरदार जसकृत सिंह रंगी उर्फ हामजा अली मजारि पाकिस्तान में छिपा हुआ दिखेगा, जो कहानी को और गहरा बनाएगा।
फरहान अख्तर इस बीच 'जी ले जरा' पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन 'डॉन 3' का भविष्य अनिश्चित है। विक्रांत मैसी ने भी विलेन का रोल ठुकरा दिया, जिससे नई कास्टिंग की तलाश शुरू हो गई है। बॉलीवुड में यह विवाद सितारों और प्रोड्यूसर्स के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर रहा है, जहां क्रिएटिव फ्रीडम और फाइनेंशियल रिस्क आमने-सामने हैं।







