हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी।
नई दिल्ली। ब्राजील के साओ पाउलो विश्वविद्यालय की नई स्टडी ने दावा किया है कि पैनिक डिसऑर्डर के इलाज में 12 हफ्ते का छोटा-तीव्र अंतराल व्यायाम (BIE) पारंपरिक रिलैक्सेशन थेरेपी से कहीं ज्यादा प्रभावी साबित हुआ। दवाओं के बिना किए गए इस प्रयोग में व्यायाम ग्रुप में पैनिक अटैक की संख्या और गंभीरता में तेजी से कमी आई।
स्टडी में 102 वयस्क मरीजों (महिला और पुरुष) को शामिल किया गया, जिन्हें पैनिक डिसऑर्डर का निदान था। फैक्ट चेक से पुष्टि हुई कि यह रिसर्च फ्रंटियर्स इन साइकियाट्री जर्नल में 9 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुई है और इसमें कोई दवा इस्तेमाल नहीं की गई—सिर्फ व्यायाम और रिलैक्सेशन का तुलनात्मक परीक्षण किया गया।
व्यायाम ग्रुप ने दिखाई जबरदस्त प्रगति
प्रयोग के दौरान मरीजों को दो ग्रुप में बांटा गया और दोनों को 12 हफ्ते तक हफ्ते में तीन सेशन दिए गए।
- व्यायाम ग्रुप: हर सेशन में पहले मसल स्ट्रेचिंग, फिर 15 मिनट वॉकिंग, उसके बाद 1 से 6 बार 30 सेकंड की हाई-इंटेंसिटी स्प्रिंट (तीव्र दौड़) और उसके बीच 4.5 मिनट एक्टिव रिकवरी। सेशन के अंत में फिर 15 मिनट वॉकिंग।
- रिलैक्सेशन ग्रुप: ब्रैकियल, स्केपुलर, सर्वाइकल, फेशियल, डोरसल, एब्डॉमिनल और लोअर लिम्ब की मसल्स में सेगमेंटल कॉन्ट्रैक्शन और फिर लोकलाइज्ड रिलैक्सेशन एक्सरसाइज।
डेटा मॉनिटरिंग डिवाइस से इकट्ठा किया गया। दोनों ग्रुप में ‘पैनिक एंड एगोरोफोबिया’ स्केल, एंग्जायटी और डिप्रेशन स्कोर समय के साथ गिरे, लेकिन व्यायाम ग्रुप में गिरावट काफी तेज और गहरी थी। पैनिक अटैक की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता में भी व्यायाम ग्रुप में ज्यादा सुधार दर्ज हुआ।
24 हफ्ते तक बने रहे फायदे
रिसर्चर्स ने निष्कर्ष निकाला कि 12 हफ्ते का ब्रिफ इंटरमिटेंट इंटेंस एक्सरसाइज (BIE) इंटरोसेप्टिव एक्सपोजर के तौर पर इस्तेमाल होने पर न सिर्फ संभव था, बल्कि रिलैक्सेशन ट्रेनिंग से बेहतर साबित हुआ। प्रभाव कम से कम 24 हफ्ते तक बने रहे।
पोस्ट-डॉक्टरल फेलो रिकार्डो विलियम मुओत्री ने कहा, “यह एक प्राकृतिक, कम लागत वाली इंटरोसेप्टिव एक्सपोजर स्ट्रैटेजी है। क्लिनिकल सेटिंग की जरूरत नहीं—पैनिक अटैक के लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी में ही एक्सपोज हो जाते हैं।” उन्होंने सुझाव दिया कि इसे एंग्जायटी और डिप्रेशन के केयर मॉडल में शामिल किया जा सकता है।
क्यों है यह खास
पैनिक डिसऑर्डर में मरीजों को अचानक सीने में दर्द, पसीना, तेज सांस और दिल की धड़कन जैसे लक्षण महसूस होते हैं। पारंपरिक इलाज में इंटरोसेप्टिव एक्सपोजर के तहत थेरेपिस्ट सुरक्षित माहौल में ये लक्षण ट्रिगर करते हैं। लेकिन यह स्टडी बताती है कि छोटी-तीव्र व्यायाम सेशन इन लक्षणों को प्राकृतिक रूप से ट्रिगर कर मरीज को उनसे डील करना सिखा सकता है—और वो भी दवा-मुक्त।
यह खोज उन लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद है, जो पैनिक अटैक से जूझ रहे हैं। रिसर्चर्स का मानना है कि यह तरीका स्वास्थ्य पेशेवर आसानी से अपना सकते हैं, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और रोजमर्रा में लागू करने योग्य है।






