स्टेट डेस्क, श्वेता प्रिया।
पटना |
बिहार कांग्रेस में अंदरूनी विवाद के बीच पार्टी ने 29 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है। नेताओं से 72 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है।
दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर कार्रवाई
यह कार्रवाई 8 सितंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के पास हुए धरना-प्रदर्शन को लेकर की गई है। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने बिहार कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन में बिहार कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की मांग भी उठाई गई थी।
प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि प्रदर्शन में शामिल होना पार्टी की नीति, अनुशासन और निर्देशों का उल्लंघन है। समिति ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना है।
72 घंटे में देना होगा जवाब
नोटिस पाने वाले नेताओं को 72 घंटे के अंदर अपना लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ पार्टी नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर तय समय के भीतर जवाब नहीं दिया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो अनुशासन समिति पार्टी नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष भी शामिल
नोटिस पाने वालों में पूर्व विधायक और पूर्व जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। इनमें पूर्व विधायक अनिल सिंह और पूनम देवी के साथ पश्चिम चंपारण के पूर्व जिलाध्यक्ष भारत भूषण दुबे, औरंगाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष मृत्युंजय सिंह, मधेपुरा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येंद्र यादव और सीवान के पूर्व जिलाध्यक्ष विधु शेखर पांडेय के नाम सामने आए हैं।
बिहार कांग्रेस में बढ़ता असंतोष
यह मामला बिहार कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी मतभेद को एक बार फिर सामने लाता है। प्रदर्शन में शामिल असंतुष्ट नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के कामकाज और पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए थे। नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग भी की थी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि 29 नेताओं की ओर से दिए जाने वाले जवाब के बाद पार्टी अनुशासन समिति क्या फैसला लेती है।







