Ad Image
Ad Image
असम में दुर्घटनाग्रस्त सुखोई 30 के दोनों पायलट शहीद: वायु सेना प्रवक्ता || JDU की बैठक में निशांत के नाम पर लग सकती है नीतीश कुमार की मुहर || आज शाम JDU की अहम बैठक: अटकलों पर लगेगा विराम, तस्वीर होगी साफ || नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद आज शाम 5 बजे बुलाई JDU की बैठक || कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए सिंघवी समेत 6 उम्मीदवारों की घोषणा की || बिहार में सियासी तूफान तेज: नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा || प. एशिया युद्ध संकट से शेयर बाजारों में भारी गिरावट जारी || समस्तीपुर: दो लाख के ईनामी जाली नोट कारोबारी को NIA ने किया गिरफ्तार || AIR इंडिया आज यूरोप, अमेरिका के लिए फिर से शुरू करेगी विमान सेवा || नागपुर: SBL एनर्जी विस्फोट में 18 की मौत, 24 से ज्यादा घायल

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

बिहार के देसी स्वाद की कहानी, हर जिले में अलग, हर कौर में लाजवाब, पढ़िए चटपटी स्टोरी

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना 

बिहार के खाने में इतिहास की महक, परंपरा का स्वाद, जानिए हर व्यंजन की कहानी

पटना, क्या आप जानते हैं कि बिहार में ऐसे की व्यंजन हैं जो न केवल आपकी भूख को बढ़ा देंगे बल्कि आपको बार-बार खाने में मजबूर कर देगा। बिहार के व्यंजन की खासियत है कि वे मुख्यतः शाकाहारी, सरल, स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं। यही कारण है कि बिहार के व्यंजनों को चखने वाले इनकी प्रशंसा किए बगैर नहीं रह पाते हैं और बारम्बार इसने चखना चाहते हैं। तो आइए जानते हैं बिहार के कुछ फेमस व्यंजनों के बारे में...

बिहार की पहचान रखने वाला लिट्टी चोखा आज अपने स्वाद की वजह से देश-विदेश में पसंद किया जा रहा है। इसे बनाने की विधि भी बेहद आसान है, जिस वजह से यह घर-घर में बनाई जाती है। लिट्टी गेहूं के आटे और सत्तू में मसाले मिलाकर गोल-गोल गेंदों के रूप में तैयार की जाती है और फिर इसे घी में डुबोया जाता है। लिट्टी की बनावट और इसकी कुरकुरी परत इसे खाने के शौकीनों के लिए बेहद खास बना देती है। चोखा उबली हुई सब्जियों जैसे आलू, बैंगन और टमाटर को मैश करके बनाया जाता है। सत्तू से बनने वाला पेय या सत्तू का नमकीन शरब भी  गर्मियों में बहुत लोकप्रिय और स्वास्थ्यवर्धक पारंपरिक पेय है, जिसकी उत्पत्ति बिहार में हुई है।
वहीं कढ़ी-बड़ी भी बिहार का एक खास व्यंजन है। इसे आमतौर पर रोटी के साथ नहीं बल्कि गरम चावल के साथ खाया जाता है। इसमें बेसन मुख्य सामग्री होती है। यह व्यंजन साल के किसी भी समय खाया जा सकता है, लेकिन अधिकतर गर्मियों में पसंद किया जाता है। 

जहां हर व्यंजन में बसता है परंपरा और स्वाद
सर्दियों के शाम में खायी जाने वाली चना घुघनी भी बिहार का मसालेदार और खट्टा-तीखालोकप्रिय नाश्ता है। यह बहुत सामान्य होने के बावजूद बेहद स्वादिष्ट होता है और बिहार के लगभग हर घर में बनाया जाता है। वहीं बिहार का पिट्ठा जो आज सोशल मीडिया पर मशहूर है, न केवल प्रदेश की पारंपरिक खानों में से एक है बल्कि इसका स्वाद भी निराला है, जो एक बार चख ले, भूलता नहीं है। इसके अलावा मनेर का लड्डू, गया का तिलकुट, उदवंतनगर की बेलग्रामी, बिहार के सुपर फूड मखाना से बनाई जाने वाली खीर मखाना, सिलाव का  खाजा, मालपुआ, बाढ़ की लाई, परवल की मिठाई, बालूशाही, चंद्रकला जैसे कई व्यंजन हैं जो केवल बिहार के पारम्परिक व्यंजनों में शुमार हैं बल्कि आज हर कोई इनके स्वाद का दिवाना है। बिहार की थाली में मौजूद ये व्यंजन अपने स्वाद और महक से हर किसी को अपना मुरीद बना रहा है। 

बिहार के स्वाद का बेमिसाल सफर
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रविशंकर उपाध्याय बताते हैं कि बिहारी खानपान का बेहद समृद्ध इतिहास रहा है। प्राचीन मगध साम्राज्य से शुरू हुआ सिलसिला आजतक चला आ रहा है। मिथिला के महाराज जनक तो खेती और यहां के व्यंजनों से इतना लगाव रखते थे कि अपने राज्य में खेती की शुरूआत स्वयं हल चलाकर किया करते थे।  प्राचीन राजगृह के आस-पास आज भी व्यंजनों पर निर्भर कस्बे मौजूद हैं, चाहे वह खाजा के बेमिसाल स्वाद वाला सिलाव हो या पेड़ा बनाने वाला निश्चलगंज। उदवंतनगर में खुरमा, ब्रह्मपुर में गुड़ई लड्डू, गुड़ की ही जलेबी तो बक्सर में सोनपापड़ी मौजूद है। थावे, गोपालगंज चले जाइए तो वहां पर आपको पेडुकिया मिलेगी। ये उदाहरण तो बस बानगी हैं, आप राज्य के जिस किसी हिस्से में चले जाइए वहां पर आपको कोई न कोई बेमिसाल स्वाद मिल जाएगा।

बिहार के व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह प्रदेश की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और जीवनशैली की भी झलक दिखाते हैं। यही वजह है कि लिट्टी-चोखा, पिट्ठा, तिलकुट या मनेर का लड्डू जैसे पारंपरिक व्यंजन आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं और समय के साथ इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।