स्टेट डेस्क, रानी कुमारी।
पटना। बिहार में मछली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन हो गया है। उत्पादन बढ़ने के साथ मत्स्य पालकों के जोखिम भी बढ़े हैं। ऐसे में सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत जलीय कृषि बीमा को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसान प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से सुरक्षित रह सकें।
योजना के तहत पात्र मत्स्य पालकों को बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक का एकमुश्त प्रोत्साहन मिलेगा। सामान्य लाभार्थियों के लिए अधिकतम प्रोत्साहन राशि एक लाख रुपये है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन के साथ यह राशि अधिकतम 1.10 लाख रुपये तक हो सकती है। केंद्र सरकार ने देशभर में एक लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र को एक्वाकल्चर बीमा सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा है। बीमा कवरेज भुगतान किए गए प्रीमियम के आधार पर 20 लाख रुपये तक हो सकता है।
योजना में न सिर्फ पारंपरिक तालाब और एक्वाकल्चर फार्म शामिल हैं, बल्कि रिकर्कुलटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, केज, बायो-फ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक मत्स्य पालन प्रणालियां भी शामिल हैं। बाढ़, सूखा, प्रदूषण, बीमारी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का कवर उपलब्ध होगा।
मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला ने बताया कि उत्पादन बढ़ने के साथ जोखिम भी बढ़ता है। तालाब बह जाना, पानी खराब होना या मछलियों में रोग लगना किसानों की पूंजी डुबा सकता है। इसलिए यह बीमा योजना मत्स्य पालकों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। बिहार में वर्तमान में 233 मत्स्य बीज हैचरियां हैं, जो राज्य की लगभग 70 प्रतिशत मत्स्य बीज आवश्यकता पूरी कर रही हैं। राज्य में 89 मत्स्य आहार मिलें भी हैं, जो स्थानीय स्तर पर लगभग 50 हजार टन मत्स्य आहार का उत्पादन कर रही हैं।
सरकार का लक्ष्य मछली उत्पादन को और बढ़ाने के साथ-साथ मत्स्य पालकों की आय को स्थिर और सुरक्षित बनाना है। इस योजना से छोटे और सीमांत मत्स्य पालक भी बिना ज्यादा आर्थिक बोझ के बीमा सुरक्षा प्राप्त कर सकेंगे।







