नेशनल डेस्क, शुभम कुमार तिवारी।
- कांग्रेस विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश से रोके जाने के आरोप पर बढ़ा विवाद; प्रताप सिंह बाजवा ने कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए और स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
चंडीगढ़। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव मंगलवार को उस समय और बढ़ गया, जब कांग्रेस के कई विधायकों को कथित तौर पर पंजाब विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इस घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस पर विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने और सदन में प्रभावी ढंग से चर्चा में भाग नहीं लेने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने विधायकों को प्रवेश से रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस नेता विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते हैं, लेकिन जब सदन की कार्यवाही चलती है तो वे बार-बार वॉकआउट करते हैं और चर्चा में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लेते। मान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अनावश्यक हंगामा करके विधानसभा की कार्यवाही को प्रभावित करती है। हालांकि, ये मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और कांग्रेस ने इस घटनाक्रम पर अलग रुख अपनाया है।
विवाद उस समय बढ़ा, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सुखपाल सिंह खैहरा, प्रताप सिंह बाजवा और परगट सिंह समेत कई विधायकों को कथित तौर पर विधानसभा परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इस घटना ने सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचित विधायकों को विधानसभा में प्रवेश करने से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
इसी दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक जसवीर सिंह राजा गिल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच कहासुनी भी हुई। यह विवाद पंजाब के मंत्री बलबीर सिंह की मीडिया से बातचीत के दौरान सामने आया। मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक सरकार के पक्ष को मीडिया के सामने रखने में बाधा डालने की कोशिश कर रहे थे। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में विधायकों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने को लेकर विरोध दर्ज कराया।
सदन में प्रश्नकाल शुरू होने के साथ ही नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कांग्रेस विधायकों को प्रवेश से रोके जाने का मुद्दा उठाया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इस मामले पर स्पष्ट किया कि किसी विधायक को सदन में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता, जब तक कि उसे निलंबित न किया गया हो। इस टिप्पणी के बाद प्रवेश रोकने के लिए इस्तेमाल किए गए नोटिस की वैधता को लेकर विवाद और तेज हो गया।
प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि विधायकों को रोकने के लिए जारी किए गए नोटिस पर विधानसभा अध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नोटिस पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं हैं, तो उसके आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को विधानसभा में प्रवेश करने से कैसे रोका जा सकता है। बाजवा ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पंजाब विधानसभा में किसी निर्वाचित विधायक को प्रवेश से रोकना असाधारण घटना है। उन्होंने सवाल किया कि विधानसभा संवैधानिक नियमों के अनुसार चल रही है या सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक हितों के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा सचिवालय की ओर से कथित तौर पर जारी किए गए बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस तरह के आदेश की वैधता स्पष्ट होनी चाहिए और विधायकों को रोकने के पीछे का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए। हालांकि, नोटिस की प्रामाणिकता और उसे जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित सभी विवरण स्वतंत्र रूप से पुष्ट होना अभी बाकी है।
इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने पंजाब विधानसभा के बाहर आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न झाड़ू को जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था। काले वस्त्र पहनकर और तख्तियां लेकर पहुंचे विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार की कार्यशैली की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता से जुड़े सवालों का जवाब देने में विफल रही है।
पूरे घटनाक्रम ने पंजाब में AAP सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संघर्ष को और तेज कर दिया है। एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है, वहीं कांग्रेस ने अपने विधायकों को प्रवेश से रोके जाने को लेकर सरकार और विधानसभा प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल, विवाद का केंद्र विधायकों के प्रवेश पर रोक लगाने की प्रक्रिया, नोटिस की वैधता और विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों की व्याख्या बना हुआ है। इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।






