Ad Image
Ad Image
असम में दुर्घटनाग्रस्त सुखोई 30 के दोनों पायलट शहीद: वायु सेना प्रवक्ता || JDU की बैठक में निशांत के नाम पर लग सकती है नीतीश कुमार की मुहर || आज शाम JDU की अहम बैठक: अटकलों पर लगेगा विराम, तस्वीर होगी साफ || नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद आज शाम 5 बजे बुलाई JDU की बैठक || कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए सिंघवी समेत 6 उम्मीदवारों की घोषणा की || बिहार में सियासी तूफान तेज: नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा || प. एशिया युद्ध संकट से शेयर बाजारों में भारी गिरावट जारी || समस्तीपुर: दो लाख के ईनामी जाली नोट कारोबारी को NIA ने किया गिरफ्तार || AIR इंडिया आज यूरोप, अमेरिका के लिए फिर से शुरू करेगी विमान सेवा || नागपुर: SBL एनर्जी विस्फोट में 18 की मौत, 24 से ज्यादा घायल

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

भारत में बच्चों का मोटापा चेतावनी: 41 मिलियन प्रभावित, चीन के बाद दूसरा स्थान

हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। विश्व मोटापा दिवस पर जारी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि भारत में पांच से 19 साल के 41 मिलियन बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) उच्च है, जिनमें 14 मिलियन मोटापे से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा चीन के बाद वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर भारत को ला खड़ा करता है, जहां स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका तेजी से बढ़ रही है।

वैश्विक संकट का केंद्र बिंदु: भारत में 2025 के अनुमान चौंकाने वाले

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की 'विश्व मोटापा एटलस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक भारत में पांच से नौ साल के लगभग 1.5 करोड़ बच्चे और 10 से 19 साल के 2.6 करोड़ से अधिक बच्चे अधिक वजन या मोटापे का शिकार होंगे। यह वृद्धि न केवल संख्या में बल्कि स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालने वाली है, जहां बाल्यावस्था में ही हृदय रोग, मधुमेह और लीवर की समस्याओं के बीज बोए जा रहे हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक स्तर पर 2025 तक मोटापे की वृद्धि को आधा करने का लक्ष्य अब 2030 तक टल चुका है, लेकिन भारत सहित अधिकांश देश अभी भी पीछे हैं। विश्वभर में केवल 10 देशों में ही पांच से 19 साल के दो करोड़ से अधिक स्कूली बच्चे मोटापे और अधिक वजन से ग्रस्त हैं। इनमें चीन शीर्ष पर है, जहां 60 मिलियन बच्चों का बीएमआई उच्च है और 30 मिलियन मोटापे से प्रभावित। अमेरिका में 20 मिलियन उच्च बीएमआई वाले बच्चे हैं, जिनमें 10 मिलियन मोटे। भारत का आंकड़ा 41 मिलियन उच्च बीएमआई और 14 मिलियन मोटे बच्चों का इसे चीन के बाद दूसरे पायदान पर स्थापित करता है।

स्वास्थ्य खतरे: 2040 तक रोगों की बाढ़ की आशंका

बच्चों में मोटापे की यह लहर स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। एटलस के अनुसार, 2025 से 2040 के बीच भारत में उच्च बीएमआई से जुड़े रोगों के मामलों में भारी उछाल आएगा। उच्च रक्तचाप के केस 29 लाख से बढ़कर 42 लाख हो जाएंगे। हाइपरग्लाइसेमिया (उच्च रक्त शर्करा) के मरीज 13 लाख से 19 लाख तक पहुंचेंगे। उच्च ट्राइग्लिसराइड्स के मामले 43 लाख से 60 लाख हो जाएंगे, जबकि चयापचय शिथिलता से जुड़े स्टीटोटिक लीवर रोग (पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज) के रोगी 83 लाख से 118 लाख तक पहुंच सकते हैं।

ये आंकड़े बाल्यावस्था में ही वयस्कों जैसी बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं, जैसे हाइपरटेंशन और हृदय रोग। वैश्विक स्तर पर 2040 तक 507 मिलियन बच्चे मोटापे या अधिक वजन से जूझेंगे, जिसमें 57 मिलियन में हृदय रोग के शुरुआती लक्षण (उच्च ट्राइग्लिसराइड्स) और 43 मिलियन में उच्च रक्तचाप के संकेत दिखेंगे। भारत में यह संकट और गहरा हो सकता है, जहां किशोरों में शारीरिक गतिविधि की कमी और खराब आहार पैटर्न प्रमुख कारण हैं।

जोखिम कारक: दैनिक आदतें जो महामारी को हवा दे रही हैं

रिपोर्ट ने भारत में विभिन्न आयु वर्गों के रोकथाम योग्य जोखिम कारकों पर रोशनी डाली है। 11 से 17 साल के किशोरों में 74 प्रतिशत अनुशंसित शारीरिक गतिविधि स्तर को पूरा नहीं कर पा रहे। प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में केवल 35.5 प्रतिशत बच्चे स्कूल भोजन प्राप्त कर रहे हैं। एक से पांच माह के शिशुओं में 32.6 प्रतिशत को इष्टतम स्तनपान नहीं मिल पा रहा। 15 से 49 साल की महिलाओं में 13.4 प्रतिशत का बीएमआई उच्च है और 4.2 प्रतिशत टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित। छह से 10 साल के बच्चों द्वारा चीनी युक्त पेय का औसत सेवन प्रतिदिन 50 मिलीलीटर तक पहुंच रहा है।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि आहार, व्यायाम और पोषण की कमी कैसे मोटापे को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य विनियमन में खामियां, जैसे चीनी युक्त पेयों पर अपर्याप्त कर और बच्चों को लक्षित मार्केटिंग, इस संकट को और भड़का रही हैं।

किशोरों में मोटापा: लड़ाई का अगला मोर्चा

किशोरावस्था में मोटापा एक उभरता खतरा बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर पांच से 19 साल के बच्चों में मोटापे की दर 2010 के 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 20.7 प्रतिशत हो गई। 2040 तक यह 507 मिलियन तक पहुंच सकता है। भारत में किशोरों की संख्या अधिक होने से प्रभाव और गहरा पड़ेगा, जहां स्कूलों में खेलकूद की कमी और फास्ट फूड का प्रलोभन प्रमुख बाधाएं हैं।

विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास पर भी असर डालेगा। किशोरों में मोटापा हृदय रोग और मधुमेह के जोखिम को दोगुना कर देता है, जो भविष्य की पीढ़ी के लिए चिंताजनक है।

सरकार की भूमिका: तत्काल कदमों की मांग तेज

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की मुख्य कार्यकारी जोहाना राल्सटन ने कहा, "बच्चों में मोटापे की यह वृद्धि दर्शाती है कि हमने एक ऐसी बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया, जो पांच में से एक बच्चे को प्रभावित कर रही है। सरकारों को बच्चों के लिए रोकथाम और प्रबंधन प्रयासों को तेज करना होगा।" फेडरेशन ने चीनी युक्त पेयों पर कर, बच्चों को लक्षित मार्केटिंग पर प्रतिबंध (डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित), वैश्विक शारीरिक गतिविधि दिशानिर्देशों का कार्यान्वयन, स्तनपान की सुरक्षा, स्वस्थ स्कूल भोजन मानकों और प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणालियों में रोकथाम एकीकरण जैसे कदमों की मांग की है।

भारत में यह संकट एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चयापचय रोगों के उच्च बोझ के साथ जुड़ रहा है, जहां भारत और चीन शीर्ष पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2040 तक भारत में 20 मिलियन बच्चे मोटापे से ग्रस्त हो सकते हैं, जो अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में बदलाव लाएगा।

वैश्विक परिदृश्य: 20 प्रतिशत बच्चे जोखिम में

दुनिया भर में पांच से 19 साल के 20.7 प्रतिशत बच्चे मोटापे या अधिक वजन से जूझ रहे हैं। यह वृद्धि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सबसे तेज है। फेडरेशन का अनुमान है कि 2040 तक हृदय रोग के शुरुआती संकेतों वाले बच्चों की संख्या 57 मिलियन से अधिक हो जाएगी। भारत जैसे देशों में यह आंकड़ा स्कूल भोजन, शारीरिक शिक्षा और परिवारिक आदतों पर निर्भर करेगा।

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि खाद्य नियमन में कमियां मोटापा महामारी को ईंधन दे रही हैं। सरकारों से तत्काल कार्रवाई की अपील की गई है, ताकि बच्चों की सेहत को बचाया जा सके।