लोकल डेस्क, राजीव कु. भारती ।
सीवान/दारौंदा। भीखाबांध गांव स्थित भैया-बहिनी मंदिर भाई-बहन के प्रेम, त्याग और समर्पण की लोककथा से जुड़ा अनोखा धार्मिक स्थल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मुगल काल में बहन की रक्षा करते हुए भाई-बहन धरती में समा गए थे। बाद में इस स्थान पर दो वट वृक्ष उगे, जिन्हें आज भाई-बहन का प्रतीक माना जाता है।
रक्षाबंधन के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोनार समाज की भी मंदिर और वट वृक्षों के प्रति विशेष आस्था है। ग्रामीणों के अनुसार, कभी करीब पांच बीघा में फैला मंदिर परिसर अब अतिक्रमण व निर्माण के कारण कुछ कट्ठे तक सीमित रह गया है। लोगों ने प्रशासन से जमीन का सीमांकन, अतिक्रमण हटाने, वट वृक्षों के संरक्षण और मंदिर को धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है।







